Shimla: सतलुज बेसिन में तेजी से सिकुड़ रहे ग्लेशियर, बड़े खतरे का आभास
punjabkesari.in Saturday, Sep 19, 2026 - 09:48 PM (IST)
शिमला (ब्यूरो): हिमाचल प्रदेश के सतलुज बेसिन में ग्लेशियरों के तेजी से सिकुड़ने का मामला सामने आया है। हिमकॉस्ट के स्टेट सैंटर ऑन क्लाइमेट चेंज की रिपोर्ट के अनुसार पिछले 20 वर्षों में सतलुज बेसिन में ग्लेशियरों का कुल क्षेत्रफल 97.59 वर्ग किलोमीटर कम हुआ है। वर्ष 2000 के आसपास यह क्षेत्रफल 1481.75 वर्ग किलोमीटर था, जो घटकर 1384.16 वर्ग किलोमीटर रह गया है। रिपोर्ट में 1120 ग्लेशियरों के मास बैलेंस का अध्ययन किया गया। वर्ष 2020 में इनमें से 875 ग्लेशियरों का मास बैलेंस नैगेटिव पाया गया।
यानी करीब 78 प्रतिशत ग्लेशियरों में बर्फ के पिघलने की मात्रा जमा होने वाली बर्फ से अधिक रही। अध्ययन में स्पीति, बस्पा, अप्पर सतलुज और लोअर सतलुज क्षेत्रों में ग्लेशियर क्षेत्रफल में कमी दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार 1005 ग्लेशियर और ग्लेशियरलेट कम हुए हैं। ग्लेशियरों के पिघलने से ऊंचाई वाले क्षेत्रों में झीलों के बनने और उनके टूटने की स्थिति में अचानक बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। इसका असर सड़क, पुल और जलविद्युत परियोजनाओं समेत निचले क्षेत्रों के बुनियादी ढांचे पर पड़ सकता है।

