Shimla: क्रिप्टो करंसी स्कैम डिजिटल साजिश को अंजाम देने वाले असली किरदारों के खुलते जा रहे राज
punjabkesari.in Sunday, Jul 19, 2026 - 05:50 PM (IST)
शिमला (राक्टा): हिमाचल और पंजाब से जुड़े 500 करोड़ रुपए के कथित क्रिप्टो करंसी स्कैम को अंजाम देने के लिए आरोपियों ने डिजिटल साजिश का ऐसा मायाजाल बुना कि कुछ ही वर्षों में करीब 500 करोड़ रुपए की कथित ठगी को अंजाम देने में सफल रहे। ऐसे में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे पूरे घोटाले को अंजाम देने वाले कथित किरदारों के राज परत-दर-परत खुलते जा रहे हैं। जांच में सामने आया है कि इस मामले की शुरूआत वर्ष 2018 में हुई, जब कोर्वियो, डीजीटी, हाइपनैक्स्ट और ए-ग्लोबल जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को क्रिप्टो करंसी में निवेश पर ऊंचे और सुनिश्चित रिटर्न का भरोसा दिया गया।
आरोपियों ने नए निवेशकों से जुटाई गई रकम से पुराने निवेशकों को भुगतान कर कथित पोंजी मॉडल संचालित किया। इस कथित नैटवर्क से 2.48 लाख से अधिक निवेशक जुड़े और 219 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का लेन-देन हुआ। शुरूआती आकलन के अनुसार निवेशकों को लगभग 500 करोड़ रुपए का नुक्सान पहुंचा। जांच में खुलासा हुआ है कि ईडी की हिरासत में चल रहे मिलन गर्ग इस पूरे रैकेट के कथित तकनीकी आर्किटैक्ट थे। उसने ही कोर्वियो, डीजीटी, हाइपनैक्स्ट और ए-ग्लोबल जैसे प्लेटफॉर्म के तकनीकी ढांचे को विकसित किया। वह कथित तौर पर निवेशकों के फंड की रूटिंग, क्रिप्टो वॉलेट्स के संचालन तथा नकदी को क्रिप्टो करंसी में परिवर्तित करने से जुड़े कार्यों में भी
जांच शुरू होने के बाद प्लेटफॉर्म को विदेशी सर्वरों पर माइग्रेट किए जाने की बात भी सामने आई है। इसी तरह सुखदेव ठाकुर और अभिषेक शर्मा क्रिप्टो करंसी योजना कोर्वियो और वोस्क्रो के शुरूआती प्रमोटरों में शामिल थे। उन्होंने ऊंचे रिटर्न के झूठे आश्वासन देकर निवेशकों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने निवेशकों से भारी मात्रा में नकदी एकत्र कर उसे जूनैजा परिवार, यानी विजय जूनैजा और मासूम जूनैजा सहित अन्य सह-आरोपियों तक पहुंचाया।
यह सब कथित तौर पर इस क्रिप्टो करंसी घोटाले में फरार मुख्य आरोपी सुभाष शर्मा के निर्देशों पर किया गया। ईडी ने दावा किया है कि अपराध से अर्जित आय से खरीदी गई जूनैजा स्क्वायर नामक संपत्ति में सुखदेव ठाकुर की 10 प्रतिशत और अभिषेक शर्मा की 5 प्रतिशत लाभकारी हिस्सेदारी थी। वर्तमान में तीनों आरोपी मिलन गर्ग, सुखदेव ठाकुर और अभिषेक शर्मा ईडी की हिरासत में हैं। ऐसे में पूछताछ के दौरान कई और अहम खुलासे होने की संभावना है।
आलीशान होटलों में होते थे सैमीनार
आरोप है कि निवेशकों को अपने झांसे में लेने के लिए आलीशान होटलों में सैमीनार आयोजित किए जाते थे। इनमें निवेशकों को ऊंचे रिटर्न का लालच देकर निवेश के लिए प्रेरित किया जाता था। ई.डी. की जांच में कई आरोपियों के बैंक खातों और क्रिप्टो वॉलेट्स के जरिए धन के लेन-देन के साक्ष्य मिले हैं। इसके अलावा कई सेल कंपनियों, रियल एस्टेट कंपनियों और अन्य व्यक्तियों के साथ बड़े वित्तीय लेन-देन भी जांच के दायरे में हैं।
मुख्य आरोपी अब भी फरार
इस मामले में मुख्य आरोपी सुभाष शर्मा पहले ही विदेश फरार हो चुका है और उसे स्वदेश लाने के प्रयास जारी हैं। आरोपी के दुबई में छिपे होने की बात सामने आई है। इस मामले में ई.डी. करोड़ों रुपए की संपत्तियां भी फ्रीज कर चुकी है। मामले में जांच जारी है और पूछताछ के आधार पर इस कथित क्रिप्टो नैटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।

