राज्यसभा सीट को लेकर हिमाचल में सियासत गर्माई, राजेंद्र राणा ने कांग्रेस सरकार और CM सुक्खू पर साधा निशाना
punjabkesari.in Sunday, Mar 08, 2026 - 11:22 PM (IST)
शिमला (ब्यूरो): हिमाचल प्रदेश की राज्यसभा सीट को लेकर प्रदेश की सियासत एक बार फिर गर्मा गई है। भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता और सुजानपुर के पूर्व विधायक राजेंद्र राणा ने कांग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर फिर से आरोप लगाते हुए कहा कि राज्यसभा चुनाव को लेकर पूरी प्रक्रिया बेहद संदिग्ध परिस्थितियों में तय की गई है। शिमला से जारी एक बयान में राजेंद्र राणा ने कहा कि मुख्यमंत्री 1 मार्च को दिल्ली दौरे पर गए थे और आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार उन्हें 2 मार्च को दिल्ली से शिमला लौटना था, लेकिन तय कार्यक्रम के बावजूद मुख्यमंत्री शिमला नहीं पहुंचे। उन्होंने कहा कि लगभग 24 घंटे तक मुख्यमंत्री सार्वजनिक रूप से कहीं दिखाई नहीं दिए, जिससे पूरे घटनाक्रम पर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
राजेंद्र राणा ने आरोप लगाया कि इन 24 घंटों के दौरान मुख्यमंत्री दिल्ली के रेडिसन होटल में ठहरे रहे, जबकि उनके आधिकारिक कार्यक्रम में किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि राज्यसभा सीट को लेकर बंद कमरे में पूरी डील फाइनल की गई। राणा ने कहा कि यह सब कुछ इतनी गोपनीयता में किया गया कि किसी को यह तक नहीं बताया गया कि मुख्यमंत्री आखिर 24 घंटे तक कहां थे। राजेंद्र राणा ने कांग्रेस के उस दावे पर भी सवाल उठाए, जिसमें प्रत्याशी को आम कार्यकर्त्ता बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति को आम कार्यकर्त्ता बताया जा रहा है, वह करोड़ों की संपत्ति का मालिक है और उसके पास लाखों रुपए की लग्जरी गाड़ियां हैं। ऐसे में कांग्रेस का यह दावा पूरी तरह से जनता को गुमराह करने वाला है।
राजेंद्र राणा के अनुसार प्रत्याशी के चुनावी हलफनामे में भी कई गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं। हलफनामे में पत्नी के नाम दर्ज संपत्ति में लाखों रुपए का अंतर दिखाई देता है, जबकि स्वयं की संपत्ति के आंकड़ों में भी करीब 99 लाख रुपए का फर्क सामने आया है। उन्होंने कहा कि यह अंतर साधारण नहीं बल्कि बड़े स्तर की गड़बड़ी की ओर संकेत करता है। राजेंद्र राणा ने कहा कि प्रत्याशी द्वारा घोषित कुल संपत्ति 22 करोड़ 43 लाख रुपए से अधिक बताई गई है, जिसमें बड़ी राशि बैंक एफडी के रूप में दर्शाई गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर मुख्यमंत्री किस आधार पर ऐसे व्यक्ति को आम कार्यकर्त्ता बता रहे हैं।
राजेंद्र राणा ने यह भी आरोप लगाया कि यह वह व्यक्ति है जो मुख्यमंत्री के बेहद करीबी माने जाते हैं। राणा ने कहा कि इससे पूरे मामले में राजनीतिक पक्षपात और सांठगांठ की आशंका और मजबूत हो जाती है। राजेंद्र राणा ने कहा कि पूरे घटनाक्रम में कई गंभीर अनियमितताएं और तथ्यों को छिपाने के आरोप सामने आए हैं। उन्होंने चुनाव आयोग से मांग की कि सारे मामले को ध्यान में रखते हुए इस चुनाव पर तुरंत प्रभाव से रोक लगाई जाए। उन्होंने केंद्र सरकार व केंद्रीय गृह मंत्रालय से भी यह मांग की है।

