Kangra: जोनल अस्पताल धर्मशाला में OPD पर्ची और टैस्ट हुए महंगे, एक्सीडैंट केस में फ्री हाेगा इलाज
punjabkesari.in Thursday, Jan 29, 2026 - 05:27 PM (IST)
धर्मशाला (प्रियंका): जोनल अस्पताल धर्मशाला में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में अहम फैसले लिए गए हैं। लंबे अंतराल के बाद गुरुवार को आयोजित रोगी कल्याण समिति की गवर्निंग बाडी बैठक में अस्पताल से जुड़ी कई योजनाओं को मंजूरी दी गई। बैठक की अध्यक्षता कृषि मंत्री प्रो. चौधरी चंद्र कुमार ने की। बैठक में निर्णय लिया गया कि अब जोनल अस्पताल में ओपीडी पर्ची के लिए मरीजों से 10 रुपए शुल्क लिया जाएगा। अल्ट्रासाऊंड की दरें 150 से रुपए बढ़ाकर अधिकतम 250 रुपए तक तय की गई हैं। ईसीजी जांच का शुल्क 40 से 50 रुपए रखा गया है, जबकि सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा। मरीजों को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से भुगतान की सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी।
कर्मचारियों के वेतन में 20 फीसदी बढ़ौतरी
बैठक में आरकेएस के तहत कार्यरत कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए उनके वेतन में 20 फीसदी बढ़ौतरी के प्रस्ताव को भी स्वीकृति दी गई। वर्तमान में 28 हजार रुपए तक वेतन पाने वाले कर्मचारियों को इस बढ़ौतरी का लाभ मिलेगा। बैठक में अस्पताल में लंबे समय से रुके मुरम्मत और अन्य विकास कार्यों को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए गए।

कार्यों में अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं होगी
कृषि मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी कि कार्यों में अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रो. चंद्र कुमार ने डाॅक्टरों, नर्सों और अस्पताल स्टाफ को मरीजों व उनके परिजनों के साथ शालीन और संवेदनशील व्यवहार करने के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अस्पताल में किसी भी तरह का दुर्व्यवहार सहन नहीं किया जाएगा। साथ ही उन्होंने मरीजों और उनके परिजनों से भी संयम और सहयोग बनाए रखने की अपील की।
आपातकालीन और अत्यंत आवश्यक मामलों में तुरंत हो जांच
कृषि मंत्री ने कहा कि यह गवर्निंग बाडी की महत्वपूर्ण बैठक रही, जिसमें स्वास्थ्य संस्थान की बेहतरी के लिए ठोस निर्णय लिए गए हैं। उन्होंने बताया कि सरकार स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में सुधार के लिए निरंतर बड़े कदम उठा रही है और आधुनिक तकनीक के माध्यम से बेहतर इलाज सुनिश्चित किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि मेडिकल काॅलेजों पर निर्भरता कम कर क्षेत्रीय अस्पतालों को मजबूत करना जरूरी है। अल्ट्रासाऊंड जैसी जांचों के लिए अब एक महीने की बजाय अधिकतम एक सप्ताह का समय तय किया जाएगा, जबकि आपातकालीन और अत्यंत आवश्यक मामलों में जांच तुरंत की जाएगी।

