हिमाचल सरकार का बड़ा फैसला: अब बिना पंजीकरण नहीं चलेंगे प्री-प्राइमरी स्कूल, नए नियम लागू
punjabkesari.in Saturday, Mar 28, 2026 - 11:18 AM (IST)
हिमाचल डेस्क। हिमाचल प्रदेश सरकार ने छोटे बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा जारी 'बाल्यावस्था देखरेख और शिक्षा केंद्र नियम 2026' के अनुसार, अब राज्य में कोई भी प्री-प्राइमरी स्कूल या डे-केयर सेंटर बिना सरकारी रजिस्ट्रेशन के नहीं चलाया जा सकेगा। सरकार जल्द ही इसके लिए एक ऑनलाइन पोर्टल शुरू करेगी, जहाँ सभी केंद्रों को आवेदन करना अनिवार्य होगा। पंजीकरण के लिए कुल 15,000 रुपये की फीस तय की गई है, जिसमें से आवेदन रद्द होने की स्थिति में 10,000 रुपये वापस कर दिए जाएंगे।
पंजीकरण की प्रक्रिया और मानक
नए नियमों के तहत स्कूलों को मान्यता तभी मिलेगी जब वे सरकार द्वारा तय मानकों पर खरे उतरेंगे। पंजीकरण प्रक्रिया तीन चरणों में होगी, जिसमें जिला स्तर से लेकर निदेशालय स्तर तक की समितियाँ स्कूल का बारीकी से निरीक्षण करेंगी। यदि किसी केंद्र में कुछ कमियाँ पाई जाती हैं, तो उसे सुधार के लिए 6 महीने का अस्थायी समय दिया जाएगा। इसके अलावा, स्कूलों को अपना रजिस्ट्रेशन खत्म होने से 6 महीने पहले ही रिन्यूअल (नवीनीकरण) के लिए आवेदन करना होगा, जिसकी फीस 10,000 रुपये रखी गई है।
बुनियादी सुविधाएँ और सुरक्षा नियम
बच्चों के बेहतर भविष्य और सुरक्षा के लिए सरकार ने बुनियादी ढांचे से जुड़े सख्त निर्देश दिए हैं। कम से कम 20 बच्चों के बैठने के लिए 28 वर्गमीटर का कमरा होना चाहिए। परिसर में खेल का मैदान, सुरक्षित पेयजल, शौचालय, रसोई और बच्चों के आराम के लिए अलग कमरा होना अनिवार्य है। हर केंद्र में सीसीटीवी कैमरे और फर्स्ट-एड किट का होना ज़रूरी है। दिव्यांग बच्चों की सुविधा के लिए रैंप और बाधा मुक्त प्रवेश का इंतज़ाम करना होगा।
पीटीए (PTA) का गठन: प्रत्येक स्कूल को एक महीने के भीतर 'अभिभावक-शिक्षक संघ' बनाना होगा, जिसमें आधी संख्या माता-पिता की होगी। बच्चों की प्रगति और सुरक्षा पर चर्चा के लिए हर तीन महीने में इनकी बैठक करना अनिवार्य है।
सख्त निगरानी और रिकॉर्ड
सरकार ने बच्चों की ग्रोथ मॉनिटरिंग (विकास की निगरानी) को भी अनिवार्य कर दिया है। केंद्रों को बच्चों का आधार कार्ड और शैक्षिक रिकॉर्ड संभाल कर रखना होगा। यदि कोई स्कूल इन नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उपायुक्त या निदेशक स्तर पर उसकी जांच की जाएगी। दोषी पाए जाने पर स्कूल को नोटिस दिया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर उसका रजिस्ट्रेशन हमेशा के लिए रद्द किया जा सकता है।

