Kangra: जातिगत आरक्षण की आवश्यकता नहीं, सरकार की सहायता का आधार आर्थिक और गरीबी हो : शांता
punjabkesari.in Saturday, Mar 07, 2026 - 05:33 PM (IST)
पालमपुर (भृगु): शांता कुमार ने कहा कि अब जातिगत आरक्षण के स्थान पर सरकार की सहायता का आधार आर्थिक और गरीबी होनी चाहिए। पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री शांता कुमार ने कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद पिछले लगभग 50 वर्षों में भारत की आर्थिक स्थिति बहुत बदल गई है। अब किसी जाति में सारे लोग न तो अमीर हैं और न ही गरीब। आरक्षित जातियों में भी कुछ प्रभावशाली लोगों ने आरक्षण का अधिक बार लाभ उठाया और वे बाकियों से अमीर हो गए। कुछ लोगों को आरक्षण का लाभ नहीं मिला, वे गरीब रहे। इस विषय पर सुप्रीम कोर्ट तीन बार कह चुका है कि आरक्षित जातियों में अमीरों की जो क्रीमीलियर बन गई है उसे शीघ्र हटाया जाए।
उन्होंने कहा कि भारत में विकास हो रहा है परन्तु उसके साथ ही आर्थिक विषमता भी बढ़ रही है। यद्यपि भारत विश्व के पांच अमीर देशों में शामिल हैं और अरबपतियों में विश्व में पांचवें स्थान पर है परन्तु विश्व में सबसे अधिक गरीब लोग भी भारत में रहते हैं। शांता कुमार ने कहा कि भारत की समस्या गरीबी नहीं है। वास्तविक समस्या आर्थिक विषमता है। कुछ लोग बहुत अधिक अमीर हो रहे हैं, कुछ लोग गरीबी में पिछड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस समस्या का अब एक ही समाधान है कि भारत में किसी भी प्रकार का आरक्षण जाति के आधार पर न होकर केवल गरीब के आधार पर हो। अब जातिगत आरक्षण की आवश्यकता नहीं है। सरकार की सहायता का आधार केवल आर्थिक और गरीबी होना चाहिए। इस प्रकार का आधार बनाने से भारत की गरीबी अतिशीघ्र दूर हो जाएगी।

