Solan News: नौणी विश्वविद्यालय से योग और मधुमक्खी पालन में करें PG डिप्लोमा, बिना एंट्रैंस टैस्ट मिलेगा दाखिला
punjabkesari.in Wednesday, Jul 15, 2026 - 07:28 PM (IST)
सोलन (ब्यूरो): डॉ. यशवंत सिंह परमार उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए योग विज्ञान तथा मधुमक्खी पालन एवं एपीथैरेपी में एक वर्षीय स्नातकोत्तर डिप्लोमा कार्यक्रम प्रारंभ किए हैं। विश्वविद्यालय ने इन दोनों कार्यक्रमों में प्रवेश के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। दोनों पाठ्यक्रम एक वर्ष की अवधि के हैं, जिनमें 2 सैमेस्टर होंगे। इनका उद्देश्य उभरते हुए क्षेत्रों में विद्यार्थियों को विशिष्ट ज्ञान, व्यावहारिक प्रशिक्षण तथा स्वरोजगार एवं उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराना है।
योग विज्ञान कार्यक्रम में 30 सीटें उपलब्ध
योग विज्ञान में स्नातकोत्तर डिप्लोमा, पुष्प विज्ञान एवं भू-दृश्य विभाग द्वारा संचालित किया जाएगा। इस कार्यक्रम का उद्देश्य योग, स्वास्थ्य एवं चिकित्सीय अनुप्रयोगों के क्षेत्र में वैज्ञानिक दृष्टिकोण से प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ तैयार करना है। पाठ्यक्रम में योग की प्राचीन परंपरा को आधुनिक वैज्ञानिक सिद्धांतों के साथ समन्वित किया गया है, जिससे विद्यार्थियों को योग के माध्यम से स्वास्थ्य संवर्धन, रोगों की रोकथाम तथा समग्र कल्याण के लिए साक्ष्य-आधारित ज्ञान एवं कौशल प्राप्त हो सके। पाठ्यक्रम में व्यापक प्रायोगिक प्रशिक्षण एवं फील्ड वर्क भी शामिल है, जिससे विद्यार्थियों को वैलनैस सैंटर, शैक्षणिक संस्थानों, स्वास्थ्य सेवाओं, कॉर्पोरेट वैलनैस कार्यक्रमों तथा स्वतंत्र योग अभ्यास के क्षेत्र में रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। इस कार्यक्रम में 30 सीटें उपलब्ध हैं।
मधुमक्खी पालन एवं एपीथैरेपी कार्यक्रम में 25 सीटें उपलब्ध
मधुमक्खी पालन एवं एपीथैरेपी में स्नातकोत्तर डिप्लोमा, कीट विज्ञान विभाग द्वारा संचालित किया जाएगा। यह एक विशिष्ट कौशल आधारित कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन, मधुमक्खी उत्पाद प्रौद्योगिकी तथा एपीथैरेपी के क्षेत्र में प्रशिक्षित विशेषज्ञ तैयार करना है। पाठ्यक्रम में मधुमक्खियों की जीव विज्ञान, एपीयरी प्रबंधन, रानी मधुमक्खी उत्पादन, मधुमक्खियों के स्वास्थ्य प्रबंधन, परागण सेवाएं, प्रवासी मधुमक्खी पालन, मधुमक्खी उत्पादों का प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन, गुणवत्ता नियंत्रण तथा उद्यम प्रबंधन जैसे विषयों का व्यापक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इस कार्यक्रम में 25 सीटें उपलब्ध हैं।
आवेदन पत्र जमा करने की अंतिम तिथि 16 अगस्त
इन दोनों कार्यक्रमों में प्रवेश के लिए किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से किसी भी विषय में स्नातक उपाधि तथा सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक (अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के अभ्यर्थियों के लिए 45 प्रतिशत अंक) होना अनिवार्य है। प्रवेश पूरी तरह से स्नातक परीक्षा में प्राप्त अंकों की मैरिट के आधार पर किया जाएगा तथा इसके लिए कोई प्रवेश परीक्षा आयोजित नहीं होगी। आवेदन पत्र जमा करने की अंतिम तिथि 16 अगस्त निर्धारित की गई है। मैरिट आधारित काऊंसलिंग 24 अगस्त को आयोजित होगी। दोनों कार्यक्रमों की कक्षाएं 28 अगस्त से प्रारंभ होंगी।
क्या कहते हैं विश्वविद्यालय के कुलपति?
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. हरमिंदर सिंह बवेजा ने कहा कि विश्वविद्यालय समाज एवं उद्योग की समकालीन आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल आधारित शैक्षणिक कार्यक्रम प्रारंभ करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि इन डिप्लोमा कार्यक्रमों को इस प्रकार तैयार किया गया है कि प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार होने के साथ-साथ उद्यमिता, स्वरोजगार तथा सतत् आजीविका को भी बढ़ावा मिले। उन्होंने कहा कि इन कार्यक्रमों में कक्षा शिक्षण के साथ व्यापक व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इन कार्यक्रमों से संबंधित प्रवेश सूचना, प्रॉस्पैक्ट्स एवं आवेदन पत्र विश्वविद्यालय की वैबसाइट पर उपलब्ध हैं।

