Sirmour: जेल में कैदियों का इलाज करने वाला डॉक्टर अब खुद अंडर ट्रायल

punjabkesari.in Tuesday, Apr 07, 2026 - 09:30 PM (IST)

नाहन (आशु): जिला सिरमौर के नाहन में सामने आए चर्चित चिट्टा मामले में जांच के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। विडंबना यह है कि जो डॉक्टर आदर्श केंद्रीय कारागार (मॉडर्न सैंट्रल जेल) नाहन में कैदियों के स्वास्थ्य की जांच करता था, वही अब अंडर ट्रायल कैदी के रूप में उसी जेल में बंद है। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि उक्त डॉक्टर स्वयं नशे का आदी था और प्रारंभिक साक्ष्यों के आधार पर उसके पूरे नैटवर्क के संचालन में भूमिका होने की भी आशंका जताई जा रही है।जानकारी के अनुसार आरोपी डॉक्टर करीब 4 से 5 वर्षों तक सैंट्रल जेल नाहन में मैडीकल ऑफिसर के पद पर तैनात रहा। करीब डेढ़ माह पूर्व ही उसका तबादला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) हरिपुरधार में किया गया था। 3 दिन के पुलिस रिमांड के बाद अदालत ने आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेजते हुए सैंट्रल जेल नाहन भेज दिया।

पुलिस सूत्रों की मानें तो जांच में नैटवर्क के बैकवर्ड लिंकेज से जुड़े अहम सुराग मिले हैं। पूछताछ में आरोपियों ने कथित रूप से खुलासा किया कि सीएचसी हरिपुरधार में तैनात डॉक्टर आदित्य शर्मा ने उन्हें हरियाणा के नारायणगढ़ से चिट्टा लाने के लिए भेजा था। पुलिस के अनुसार चिट्टा लाने के लिए स्कूटी का इस्तेमाल किया गया। पुलिस की एसआईयू टीम ने 31 मार्च को दोसड़का से आगे नेचर पार्क के पास से 2 युवकों को चिट्टे सहित गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान नाहन निवासी अभिमन्यु ठाकुर और भानु गर्ग के रूप में हुई। इनके कब्जे से 6.68 ग्राम चिट्टा बरामद किया था।

सूत्रों के अनुसार जांच एजैंसियों को इस बात के संकेत मिले हैं कि आरोपी डॉक्टर की भूमिका केवल नशा मंगवाने तक सीमित नहीं हो सकती, बल्कि उसके आर्थिक लेनदेन से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है। साथ ही उसके नशा सेवन से जुड़े तथ्यों की भी पड़ताल की जा रही है। पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि कहीं यह मामला किसी संगठित नैटवर्क से तो जुड़ा नहीं है, जिसमें अन्य लोगों की संलिप्तता भी हो सकती है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) स्तर पर इस पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है। इसकी पुष्टि सीएमओ डॉ. राकेश प्रताप ने की है।

नियमों के अनुसार आरोपी डॉक्टर को “डीम्ड सस्पैंशन” (स्वतः निलंबन) की श्रेणी में माना गया है। प्रावधान है कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी 48 घंटे से अधिक समय तक पुलिस हिरासत में रहता है तो वह स्वतः निलंबित माना जाता है और इसके लिए अलग से आदेश जारी करने की आवश्यकता नहीं होती। एसपी सिरमौर एनएस नेगी ने बताया कि फिलहाल पुलिस मामले की हर कड़ी को जोड़ने में जुटी हुई है और मोबाइल कॉल डिटेल, वित्तीय लेनदेन व अन्य संभावित संपर्कों की गहन जांच की जा रही है।


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Kuldeep

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