Sirmour: आंगनबाड़ी कर्मी की मौत पर उबाल, 8 को होंगे प्रदेश भर में प्रदर्शन
punjabkesari.in Sunday, Jan 04, 2026 - 06:14 PM (IST)
नाहन (आशु): मंडी जिले के तारना वृत्त में पल्स पोलियो ड्यूटी के दौरान गिरने से आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ता हर्षा की मौत के बाद प्रदेश में आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ताओं की सुरक्षा और जवाबदेही के मुद्दे को लेकर 8 जनवरी को प्रदेश भर में प्रदर्शन होंगे। आंगनबाड़ी वर्कर्ज एवं हैल्पर्ज यूनियन (सीटू) से जुड़ीं जिला व प्रोजैक्ट इकाइयों ने जारी बयान में आरोप लगाया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ताओं से बहु विभागीय कार्य तो करवाए जाते हैं, लेकिन दुर्घटना या मृत्यु की स्थिति में न विभाग जिम्मेदारी लेता है और न ही सरकार। यूनियन ने इसे कर्मचारियों की जान से खिलवाड़ बताया है।
हादसा होने पर सभी पल्ला झाड़ लेते हैं
यूनियन की जिलाध्यक्ष शामा, महासचिव वीना, पांवटा साहिब प्रोजैक्ट अध्यक्ष इंदु तोमर व महासचिव देव कुमारी, सराहां प्रोजैक्ट अध्यक्ष वंदना, नाहन प्रोजैक्ट अध्यक्ष सुमन व महासचिव शीला ठाकुर, संगड़ाह प्रोजैक्ट अध्यक्ष नीलम, शिलाई प्रोजैक्ट अध्यक्ष अनीता व महासचिव चंद्रकला, राजगढ़ प्रोजैक्ट अध्यक्ष सविता व शशि ठाकुर ने कहा कि पल्स पोलियो, बी.एल.ओ. ड्यूटी, फेस ट्रैकिंग व हाऊस-टू-हाऊस सर्वे जैसे जोखिम भरे काम आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ताओं से करवाए जाते हैं, लेकिन हादसा होने पर सभी पल्ला झाड़ लेते हैं।
यूनियन ने याद दिलाया कि 2 वर्ष पहले कुल्लू के सैंज क्षेत्र में और जून 2024 में चम्बा जिले में मीटिंग के लिए जाते समय सरला और श्रेष्ठा की सड़क दुर्घटना में मौत हुई थी। सभी मामलों में एक ही सवाल खड़ा होता है, क्या आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ताओं की जान की कोई कीमत नहीं है? यूनियन ने कहा कि बेहद कम मानदेय पर काम करवाने के बावजूद दुर्घटना बीमा, जोखिम भत्ता और सामाजिक सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखना आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ताओं का खुला शोषण है।
ये उठाईं मांगें
यूनियन ने मंडी के तारना वृत्त में मृत आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ता हर्षा के परिजनों को 50 लाख रुपए मुआवजा देने, ड्यूटी के दौरान पूर्व में हुईं सभी मौतों पर एक समान मुआवजा नीति लागू करने, जिस विभाग का काम करवाया जाए, उस विभाग की स्पष्ट जवाबदेही तय करने, सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ताओं को दुर्घटना बीमा, जोखिम भत्ता और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने जैसी मांगें सरकार से पूरा करने की मांग की है। यूनियन ने साफ कहा कि यदि सरकार ने इस बार भी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन सिर्फ प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रदेश सरकार और संबंधित विभागों की होगी।

