Shimla: सांसद हर्ष महाजन ने राज्यसभा में उठाया हिमाचल के रेल प्रोजैक्ट्स का मुद्दा, केंद्रीय रेल मंत्री ने पेश की विस्तृत रिपोर्ट
punjabkesari.in Friday, Mar 13, 2026 - 02:54 PM (IST)
शिमला: हिमाचल प्रदेश में चल रही विभिन्न रेल परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति को लेकर केंद्र सरकार ने राज्यसभा में विस्तृत रिपोर्ट पेश की है। हिमाचल से भाजपा नेता एवं राज्यसभा सांसद हर्ष महाजन द्वारा पूछे गए एक अहम सवाल के जवाब में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि प्रदेश में कई महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं पर युद्धस्तर पर कार्य जारी है और इन पर हजारों करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। सांसद महाजन ने अंब-अंदौरा विस्तार, बिलासपुर लाइन, बिलासपुर-मनाली-लेह और पठानकोट-जोगिंदरनगर नैरोगेज को ब्रॉडगेज में बदलने की स्थिति पर सरकार से जवाब मांगा था।
अंब-अंदौरा-मुकेरियां रेल लाइन विस्तार का कार्य प्रगति पर
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि अंब-अंदौरा रेल लाइन को मुकेरियां तथा जालंधर-जम्मू मार्ग से जोड़ने के लिए विस्तार किया जा रहा है। नंगल डैम से दौलतपुर चौक तक 60 किलोमीटर का काम पहले ही पूरा हो चुका है। वहीं, दौलतपुर चौक से मुकेरियां (42 कि.मी.) के बीच काम तेजी से चल रहा है। इसमें दौलतपुर चौक-करटोली (10.5 किमी) का काम पूरा हो गया है। करटोली-तलवाड़ा (13.65 कि.मी.) खंड में 25 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है, जहां 9.2 किमी लंबे वायाडक्ट, 1 प्रमुख पुल, 7 छोटे पुल, 2 आरओबी और 8 आरयूबी पर काम चल रहा है। तलवाड़ा-मुकेरियां (28.70 कि.मी.) खंड में 13 बड़े पुलों का काम 70 प्रतिशत पूरा हो गया है और 40 में से 29 आरयूबी बन चुके हैं।
चंडीगढ़-बद्दी रेल लाइन के वायाडक्ट का 75 फीसदी काम पूरा
चंडीगढ़-बद्दी (33 कि.मी.) नई रेल लाइन परियोजना के संबंध में रेल मंत्री ने बताया कि इसे 1540 करोड़ रुपए की लागत से 50-50 प्रतिशत (केंद्र-राज्य) की हिस्सेदारी पर मंजूरी दी गई थी। इस पर अब तक 1068.88 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। इस परियोजना में हिमाचल सरकार की हिस्सेदारी 534 करोड़ रुपए है, जिसमें से राज्य ने 348 करोड़ रुपए जमा करा दिए हैं, जबकि 186 करोड़ रुपए शेष हैं। परियोजना के लिए 97 हैक्टेयर भूमि अधिग्रहण और वन स्वीकृति मिल चुकी है। 9 किलोमीटर लंबे वायाडक्ट का 75 फीसदी काम हो चुका है और पुलों तथा स्टेशनों का निर्माण जारी है।
भानुपल्ली-बिलासपुर-बेरी लाइन की 16 में से 15 सुरंगें तैयार
भानुपल्ली-बिलासपुर-बेरी नई रेल लाइन (63 कि.मी.) का निर्माण 75:25 (केंद्र और राज्य) के अनुपात में किया जा रहा है। इस परियोजना की अनुमानित लागत 6753 करोड़ रुपए है, लेकिन अब तक इस पर 7729 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। राज्य सरकार की कुल हिस्सेदारी 2781 करोड़ रुपये बनती है, जिसमें से केवल 847 करोड़ जमा हुए हैं और 1934 करोड़ रुपए अभी राज्य की ओर से लंबित हैं। भौतिक प्रगति की बात करें तो 16 में से 15 सुरंगें बन चुकी हैं। 27 में से 10 बड़े पुल, 8 में से 6 आरओबी, 5 में से 4 आरयूबी और 6 में से 3 स्टेशन भवन बनकर तैयार हो चुके हैं।
बिलासपुर-मनाली-लेह लाइन की डीपीआर तैयार, 1.31 लाख करोड़ रुपए होंगे खर्च
रक्षा मंत्रालय द्वारा रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी गई बिलासपुर-मनाली-लेह (489 कि.मी). नई रेल लाइन का सर्वेक्षण पूरा कर लिया गया है और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार है। इस महात्वाकांक्षी परियोजना की अनुमानित लागत 1.31 लाख करोड़ रुपए है, जिसमें लगभग 270 किलोमीटर लंबी सुरंगें बनाई जानी प्रस्तावित हैं। इसके अलावा 200 किलोमीटर लंबी पठानकोट-जोगिंदरनगर नैरोगेज लाइन को ब्रॉडगेज में बदलने के लिए भी सर्वेक्षण को मंजूरी मिल गई है और इसकी डीपीआर तैयार की जा रही है।
रेलवे बजट में 25 गुना से अधिक की ऐतिहासिक वृद्धि
रेल मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार हिमाचल प्रदेश में रेलवे ढांचे को मजबूत करने के लिए बजट में भारी बढ़ौतरी की गई है। यूपीए सरकार के समय (2009-14) जहां औसतन मात्र 108 करोड़ रुपए प्रति वर्ष मिलते थे, वहीं 2025-26 के लिए इसे बढ़ाकर 2716 करोड़ रुपए कर दिया गया है, जो 25 गुना से भी अधिक की वृद्धि है। वर्तमान में प्रदेश में 17,622 करोड़ रुपये की लागत से 214 किलोमीटर लंबी तीन नई रेल लाइनों पर काम चल रहा है। इसमें से 64 किलोमीटर लाइन चालू हो चुकी है और मार्च 2025 तक 8280 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं।
पर्यटन और व्यापार को मिलेगी नई गति: हर्ष महाजन
केंद्र सरकार के इस विस्तृत जवाब के बाद सांसद हर्ष महाजन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के कुशल नेतृत्व में केंद्र सरकार हिमाचल में रेल नैटवर्क को मजबूत करने के लिए निरंतर और गंभीर प्रयास कर रही है। महाजन ने कहा कि इन रेल परियोजनाओं के पूरा होने से प्रदेश में न केवल पर्यटन और व्यापार को बड़े पैमाने पर बढ़ावा मिलेगा, बल्कि सामरिक दृष्टि से भी देश को मजबूती मिलेगी और हिमाचल के विकास को एक नई गति प्राप्त होगी।

