मानसून के लिए कांगड़ा प्रशासन की तैयारी पूरी, आपदा प्रबंधन के लिए नियुक्त किए जाएंगे नोडल अधिकारी

punjabkesari.in Thursday, Jun 11, 2026 - 10:45 AM (IST)

Dharamshala News : हिमाचल प्रदेश में कांगड़ा उपायुक्त हेमराज बैरवा ने कहा है कि आगामी मानसून सीजन के मद्देनजर जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है और आपदा से जुड़ी किसी भी स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सभी जरूरी तैयारियां पूरी कर रहा है। उपायुक्त कार्यालय के एनआईसी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग हॉल में मंगलवार को विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ मानसून-पूर्व तैयारियों की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए बैरवा ने कहा कि मानसून अवधि के दौरान आपदा प्रबंधन कर्तव्यों के लिए सभी विभागों के नोडल अधिकारी नियुक्त किये जाएंगे।

पर्याप्त स्टॉक बनाये रखने का निर्देश

बैठक में अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट शिल्पी बेक्टा और अन्य विभागीय अधिकारी शामिल हुए, जबकि उप जिलाधिकारी (एसडीएम) वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। उपायुक्त ने संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि वे बारिश शुरू होने से पहले कुल्हों (पारंपरिक सिंचाई नहरों), नालों और अन्य जल निकासी प्रणालियों की सफाई सुनिश्चित करें, ताकि जलभराव और सड़कों को होने वाले नुकसान से बचाया जा सके। उन्होंने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को भूस्खलन संभावित सड़कों और संवेदनशील स्थानों की सूची पहले से ही तैयार करने के निर्देश भी दिए। बैरवा ने कहा कि लोक निर्माण विभाग, जल शक्ति और बिजली विभागों को आपातकालीन स्थिति में त्वरित कार्रवाई के लिए जेसीबी मशीनें, उपकरण और अन्य संसाधन तैयार रखने को कहा गया है। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग को सुदूर क्षेत्रों में आवश्यक वस्तुओं का पर्याप्त स्टॉक बनाये रखने का निर्देश दिया गया है, जबकि स्वास्थ्य विभाग को जीवन रक्षक और आवश्यक दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है। उन्होंने कहा कि आपदा से जुड़ी सूचनाओं पर त्वरित कार्रवाई की सुविधा के लिए जिला और उपखंड स्तर पर आपदा प्रबंधन नियंत्रण कक्ष स्थापित किए जाएंगे।

उप खंड के अधिकारियों को स्थानीय तैयारियों की समीक्षा करने और जन जागरूकता बढ़ाने के लिए पंचायत प्रतिनिधियों, स्वयंसेवकों और विभागीय अधिकारियों के साथ बैठकें करने के निर्देश भी दिए गए हैं। उपायुक्त ने शिक्षा विभाग को उन खाली पड़े स्कूल भवनों की सूची उपलब्ध कराने के निर्देश दिये, जिनका उपयोग मानसून अवधि के दौरान आवश्यकता पड़ने पर राहत एवं बचाव कार्यों के लिए किया जा सके। इसके साथ ही भूस्खलन के प्रति संवेदनशील स्कूल भवनों का विवरण भी निर्धारित समय सीमा के भीतर मांगा गया है। 

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Content Editor

Swati Sharma

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