HRTC Electric Buses: इलेक्ट्रिक बसों के डिजाइन में बदलाव करने का फैसला, जानें क्या होगा लाभ?

punjabkesari.in Wednesday, Apr 15, 2026 - 12:42 PM (IST)

हिमाचल डेस्क। हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) ने बसों के डिजाइन में बदलाव करने का फैसला लिया है। जिसके कारण राज्य के पहाड़ी और ग्रामीण इलाकों की भौगोलिक स्थिति भी बदल जाएगी।  यह कदम पहाड़ी क्षेत्रों की खराब सड़कों को लेकर लिया गया है। 

बसों की 'ग्राउंड क्लीयरेंस' में बढ़ोतरी

HRTC द्रारा प्रदेश के 36 रुटों पर ट्रायल किया गया। जिसके चलते कई खामियां सामने आई है। ट्रायल के दौरान यह पाया गया कि ऊबड़-खाबड़ रास्तों और ऊंचे स्पीड ब्रेकर्स पर बसों का निचला हिस्सा जमीन से टकरा रहा था। लेकिन मैदानी इलाकों में बसों का प्रदर्शन संतोषजनक रहा। 

इस समस्या के समाधान के लिए बसों की ग्राउंड क्लीयरेंस को 170 mm से बढ़ाकर 200 mm किया गया है। इसके लिए निर्माण कंपनी, ओलेक्ट्रा ग्रीनटेक लिमिटेड को जरूरी निर्देश जारी कर दिए गए हैं। कंपनी ने एक बार चार्ज करने पर 180 किलोमीटर का दावा किया था, लेकिन पहाड़ी रास्तों पर बसें केवल 160 किलोमीटर ही चल पाईं।

निगम ने साफ कर दिया है कि जब तक कंपनी तय मानकों और माइलेज की शर्तों को पूरा नहीं करती, तब तक बसों की डिलीवरी स्वीकार नहीं की जाएगी।

डिलीवरी में देरी और भारी जुर्माना

पिछले साल HRTC ने 424 करोड़ रुपये की लागत से 297 ई-बसों का ऑर्डर दिया था। समझौते के तहत कंपनी को 11 महीने के भीतर सप्लाई पूरी करनी थी। 9 जनवरी तक कम से कम 50% बसें मिल जानी चाहिए थीं, जो अब तक नहीं मिली हैं।

एचआरटीसी के उपाध्यक्ष अजय वर्मा के अनुसार, बसों की सप्लाई में होने वाली देरी के लिए कंपनी पर सख्त जुर्माना लगाया जाएगा। देरी जितनी लंबी होगी, जुर्माने की राशि उतनी ही बढ़ती जाएगी।

इस बदलाव से क्या होगा लाभ?

अब इलेक्ट्रिक बसें केवल शहरों तक सीमित न रहकर दूरदराज के ग्रामीण इलाकों तक जा सकेंगी। तीखे मोड़ों और खराब रास्तों पर बसों के फंसने या टकराने का खतरा कम होगा। इलेक्ट्रिक बसों के सफल संचालन से पहाड़ी क्षेत्रों में प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी।


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Content Editor

Jyoti M

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