Himachal Weather Update: हिमाचल में लुढ़का पारा, इस दिन बर्फबारी और बारिश का Yellow Alert
punjabkesari.in Monday, Jan 19, 2026 - 12:58 PM (IST)
हिमाचल डेस्क। हिमाचल प्रदेश के ऊंचे इलाकों में कुदरत का मिजाज बदलते ही सर्द हवाओं के साथ बर्फबारी का दौर आरंभ हो गया है। लंबे समय से सूखे की मार झेल रहे इस पहाड़ी राज्य के लिए रविवार की सुबह नई उम्मीदें लेकर आई, जब रोहतांग दर्रे से लेकर लाहुल-स्पीति की घाटियों तक आसमान से चांदी बरसने लगी।
प्रमुख ऊंचाइयों पर ताज़ा हिमपात
लाहुल-स्पीति और मनाली के शिखर अब बर्फ से सराबोर हैं। कुंजम दर्रा, बारालाचा और प्रसिद्ध चंद्रताल झील के आसपास के क्षेत्रों में भारी बर्फ गिरी है। विशेष रूप से शिंकुला दर्रा पहुंचने वाले सैलानियों के लिए यह अनुभव जादुई रहा, जहाँ गिरते हुए बर्फ के फाल्कों ने उनका स्वागत किया।
पारे में भारी गिरावट और 'यलो अलर्ट'
बर्फबारी के इस नए दौर ने समूचे प्रदेश को ठिठुरने पर मजबूर कर दिया है। पिछले 48 घंटों के भीतर प्रदेश के दिन और रात के तापमान में लगभग 5 डिग्री सेल्सियस की कमी दर्ज की गई है। मौसम विज्ञान केंद्र ने आने वाले दिनों के लिए सख्त चेतावनी जारी की है:
भारी चेतावनी: 23 जनवरी के लिए प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बर्फबारी और बारिश का यलो अलर्ट है।
शीतलहर का प्रकोप: 19 और 20 जनवरी को मंडी, बिलासपुर, ऊना और हमीरपुर जैसे मैदानी व मध्यम ऊंचाई वाले जिलों में कड़ाके की ठंड और शीतलहर चलने की संभावना है।
तापमान का हाल: मनाली, भुंतर, सुंदरनगर और बजौरा जैसे क्षेत्रों में पारा सबसे ज्यादा लुढ़का है।
सूखे से त्रस्त खेती और दुआओं का दौर
प्रदेश में पिछले साढ़े तीन महीनों से बारिश न होने के कारण स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। सूखे की वजह से मटर और सरसों की पैदावार प्रभावित हुई है, वहीं गेहूं की फसल भी खेतों में पीली पड़ने लगी है।
इसी संकट को देखते हुए धर्मशाला के होटल संचालकों ने एक अनोखी पहल की। होटल एसोसिएशन के सदस्य खनियारा स्थित भगवान श्री इंद्रुनाग (वर्षा के देवता) के मंदिर पहुंचे और विशेष पूजा-अर्चना की। उन्होंने प्रार्थना की कि जल्द ही राज्य में मेघ बरसें ताकि पर्यटन और कृषि दोनों को संजीवनी मिल सके।
पश्चिमी विक्षोभ से राहत की आस
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, 22 जनवरी से एक नया पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) सक्रिय हो रहा है। इसके प्रभाव से सूखे का लंबा स्पेल खत्म होने और व्यापक स्तर पर वर्षा व हिमपात होने की प्रबल संभावना है, जिससे किसानों और बागवानों के चेहरे खिल सकते हैं।

