Shimla: 17 लाख पन्नों में कैद हिमाचल का इतिहास अब होगा डिजिटल, जल्द खुलेगा ऑनलाइन पोर्टल

punjabkesari.in Tuesday, Sep 08, 2026 - 05:53 PM (IST)

शिमला (ब्यूरो): हिमाचल प्रदेश की सदियों पुरानी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को अब डिजिटल माध्यम से संरक्षित किया जाएगा। राज्य अभिलेखागार में सुरक्षित दुर्लभ दस्तावेजों के करीब 17 लाख पृष्ठों का प्रथम चरण में डिजिटलीकरण पूरा कर लिया गया है। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि यह प्रदेश की अमूल्य दस्तावेजी विरासत को सुरक्षित रखने और इसे आम लोगों व शोधकर्त्ताओं तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

राज्य अभिलेखागार में वर्ष 1807 से अब तक के 30 हजार से अधिक ऐतिहासिक अभिलेख सुरक्षित हैं। इनमें दुर्लभ पुस्तकें, गजेटियर, सैटलमैंट रिपोर्ट, पांडुलिपियां और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज शामिल हैं। इन अभिलेखों का देश-विदेश के शोधकर्त्ता, इतिहासकार और शिक्षाविद् अध्ययन एवं शोध के लिए उपयोग करते हैं। मुकेश अग्निहोत्री ने बताया कि संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से ज्ञान भारतम् मिशन के तहत नैशनल मैनुस्क्रिप्ट सर्वे भी चल रहा है। इसके तहत प्रदेश में उपलब्ध दुर्लभ एवं प्राचीन पांडुलिपियों की पहचान, सर्वेक्षण और अभिलेखीकरण किया जा रहा है। चिन्हित पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण हिमाचल राज्य संग्रहालय शिमला में स्थापित कलस्टर सैंटर के माध्यम से नैशनल डिजिटाइजेशन ड्राइव के तहत किया जा रहा है।

सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से विकसित होगा पोर्टल
मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि डिजिटल अभिलेखों को आम नागरिकों और शोधकर्त्ताओं के लिए आसानी से उपलब्ध करवाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से अत्याधुनिक डिजिटल आर्काइव्स पोर्टल विकसित किया जाएगा। पूरी तरह सर्चेबल डिजिटल डेटा को पोर्टल पर उपलब्ध करवाया जाएगा, जिससे शोधकर्त्ताओं, इतिहासकारों, शिक्षाविदों और आम जनता को हिमाचल के ऐतिहासिक दस्तावेज ऑनलाइन देखने और शोध के लिए उपयोग करने की सुविधा मिलेगी। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सर्वेक्षण के दौरान चिन्हित दुर्लभ एवं प्राचीन पांडुलिपियों की डिजिटल प्रतियां भी राज्य अभिलेखागार में सुरक्षित रखी जाएंगी। इससे देश-विदेश से आने वाले शोधार्थियों को अपने विषय से संबंधित दुर्लभ सामग्री आसानी से उपलब्ध हो सकेगी।


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Content Writer

Kuldeep

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