''विकसित भारत के लिए शिक्षा, इनोवेशन और सामाजिक जरूरतों का तालमेल जरूरी", हमीरपुर NIT में बोले राज्यपाल कविंदर गुप्ता

punjabkesari.in Sunday, Oct 11, 2026 - 10:35 AM (IST)

Hamirpur News : हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने शनिवार को 'विकसित भारत @2047' के विजन को साकार करने के लिए शिक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान, इनोवेशन और सामाजिक जरूरतों के बीच संबंधों को मजबूत करने का आह्वान किया। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT), हमीरपुर में "विज्ञानमय भारत-विकसित भारत" विषय पर आयोजित 'शिक्षा महाकुंभ अभियान' के छठे संस्करण को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि एक विकसित भारत की नींव वैज्ञानिक सोच, अनुसंधान की संस्कृति, इनोवेशन और वास्तविक दुनिया की समस्याओं को हल करने की क्षमता पर टिकी होनी चाहिए।

राज्यपाल ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बायोटेक्नोलॉजी, रोबोटिक्स, अंतरिक्ष विज्ञान और डिजिटल टेक्नोलॉजी जैसी उभरती हुई तकनीकें दुनिया को बदल रही हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का जिक्र करते हुए, उन्होंने समग्र, बहु-विषयक और कौशल-आधारित शिक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया, जो आलोचनात्मक सोच, रचनात्मकता, संचार और समस्या-समाधान क्षमताओं का विकास करे। उन्होंने छात्रों से केवल उपभोक्ता बनने के बजाय टेक्नोलॉजी के निर्माता और इनोवेटर बनने का आग्रह किया और उन्हें सवाल पूछने, प्रयोग करने, विफलता से सीखने और व्यावहारिक समाधान विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया। सामाजिक प्रभाव वाले अनुसंधान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कविंदर गुप्ता ने कहा कि वैज्ञानिक खोजों और तकनीकी प्रगति से किसानों को लाभ होना चाहिए, स्वास्थ्य सेवा में सुधार होना चाहिए, दूरदराज के क्षेत्रों में छात्रों को सहायता मिलनी चाहिए, पानी और ऊर्जा का संरक्षण होना चाहिए, आपदा प्रबंधन मजबूत होना चाहिए और पहाड़ी क्षेत्रों की विशिष्ट चुनौतियों का समाधान किया जाना चाहिए। उन्होंने स्थानीय रूप से प्रासंगिक, किफायती और टिकाऊ तकनीकों की आवश्यकता पर ज़ोर दिया जो समाज की जरूरतों को पूरा करें।

कविंदर गुप्ता ने कहा कि विचारों को व्यावहारिक समाधानों में बदलने के लिए शिक्षा, विश्वविद्यालयों, अनुसंधान प्रयोगशालाओं, स्टार्ट-अप, उद्योगों और समाज को मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि तकनीकी प्रगति नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी से निर्देशित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्रों में जिज्ञासा, वैज्ञानिक सोच, कौशल और चरित्र को विकसित करने में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इस बात पर जोर देते हुए कि विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चलने चाहिए, गवर्नर ने कहा कि विज्ञान और टेक्नोलॉजी को प्रकृति के साथ बेहतर संतुलन बनाने में मदद करनी चाहिए। उन्होंने इस अहम पहल को आगे बढ़ाने के लिए आयोजकों और सहयोगी संस्थानों को बधाई दी और भरोसा जताया कि 'एजुकेशन महाकुंभ 6.0' ज्ञान से इनोवेशन, इनोवेशन से समाधान और समाधान से राष्ट्र-निर्माण के सफर में अहम योगदान देगा।

प्रदेश से जुड़ी खबरें पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp group को Join करें  
 


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Editor

Swati Sharma

Related News