Himachal: जूस में निकली फंगस...सावन का व्रत हुआ भंग, उपभोक्ता आयोग ने कंपनी पर ठोका भारी जुर्माना
punjabkesari.in Tuesday, Jul 14, 2026 - 12:23 PM (IST)
धर्मशाला (ब्यूरो): नामी कंपनियों के पैक्ड जूस पर आंख मूंदकर भरोसा करना आपकी सेहत पर भारी पड़ सकता है। कांगड़ा (धर्मशाला) के जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने ऐसे ही एक गंभीर मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए उपभोक्ता को बड़ी राहत दी है। आयोग ने सीलबंद जूस के पैकेट में फंगस निकलने के मामले में एफएमसीजी कंपनी डाबर इंडिया लिमिटेड को लापरवाही का दोषी मानते हुए लाखों रुपए का जुर्माना लगाया है।
स्वाद अजीब लगा तो खोला पैक, अंदर तैर रही थी काली फंगस
पूरा मामला इंदौरा निवासी करणवीर सिंह से जुड़ा है। उन्होंने 26 जुलाई 2024 को एक स्थानीय दुकान से रियल फ्रूट पावर मौसंबी जूस खरीदा था। जूस पीने के दौरान करणवीर को इसका स्वाद कुछ अजीब और असामान्य लगा। संदेह होने पर जब उन्होंने पैक को काटकर अंदर देखा, तो उनके होश उड़ गए। जूस के अंदर काले रंग की फंगस मौजूद थी। इस दूषित जूस ने न केवल उपभोक्ता की सेहत को बड़े खतरे में डाला, बल्कि इसे पीने से करणवीर का सावन का पवित्र व्रत भी भंग हो गया।
लैब रिपोर्ट में खुली पोल, कंपनी की दलीलें हुईं खारिज
उपभोक्ता की शिकायत के बाद आयोग ने मामले की गहनता से जांच की और जूस का सैंपल टैस्टिंग के लिए लैब भेजा। लैब की रिपोर्ट ने दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया। रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि जूस के अंदर फंगस जैसी गंदगी मौजूद थी और यह इंसानों के पीने के लिए पूरी तरह असुरक्षित था। हालांकि, डाबर कंपनी ने अपने बचाव में दलील दी कि उनका निर्माण बैच सुरक्षित था, लेकिन आयोग ने लैब रिपोर्ट को ही सबसे पुख्ता सबूत मानते हुए कंपनी की दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया। आयोग ने स्पष्ट किया कि इस मामले में दुकान संचालक की कोई गलती नहीं है और पूरी जिम्मेदारी जूस बनाने वाली कंपनी की है।
45 दिन का अल्टीमेटम, चुकाने होंगे 1 लाख रुपए
निर्माण प्रक्रिया में इस तरह की गंभीर और जानलेवा लापरवाही पर आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। उपभोक्ता फोरम ने डाबर इंडिया लिमिटेड को आदेश दिया है कि वह पीड़ित उपभोक्ता को मानसिक व शारीरिक परेशानी के लिए 60,000 रुपए का मुआवजा और 10,000 रुपए मुकद्दमा खर्च के तौर पर दे। इसके अलावा, कंपनी को 30,000 रुपए उपभोक्ता कल्याण कोष में भी जमा करवाने होंगे। आयोग ने 45 दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि समय पर भुगतान नहीं हुआ, तो कंपनी को 9 प्रतिशत का अतिरिक्त ब्याज भी चुकाना होगा।
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