Earthquake: हिमाचल के इस जिले में आया 3.1 तीव्रता का भूकंप, दहशत में घरों से बाहर भागे लोग
punjabkesari.in Sunday, Aug 02, 2026 - 12:26 PM (IST)
मंडी: हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में रविवार को उस समय दहशत फैल गई, जब धरती में हुई हलचल ने लोगों को घरों से बाहर भागने पर मजबूर कर दिया। सुबह 9 बजकर 13 मिनट और 18 सैकेंड पर मंडी में भूकंप के झटके महसूस किए गए। हालांकि, गनीमत यह रही कि रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता महज 3.1 थी, जिसके चलते किसी भी तरह के जानमाल के नुक्सान की खबर नहीं है। लेकिन इस हल्के झटके ने एक बार फिर हिमाचल प्रदेश की उस भौगोलिक संवेदनशीलता की याद दिला दी है, जो राज्य को भूकंप के उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में ला खड़ा करती है।
नैशनल सैंटर फॉर सीस्मोलॉजी के आंकड़ों के अनुसार इस भूकंप का केंद्र मंडी जिले में जमीन से लगभग 8 किलोमीटर की गहराई में स्थित था। रविवार का दिन होने के कारण अधिकांश लोग अपने घरों में आराम कर रहे थे। जैसे ही कंपन महसूस हुआ, लोग एहतियात बरतते हुए तुरंत सुरक्षित और खुले स्थानों की ओर दौड़ पड़े। कुछ देर बाहर रुकने के बाद, स्थिति सामान्य होने पर ही लोग वापस अपने घरों में लौटे।
विशेषज्ञों के मुताबिक भले ही यह भूकंप हल्का था, लेकिन यह इस बात का संकेत है कि धरती के गर्भ में टैक्टोनिक प्लेट्स सक्रिय हैं। पूरे देश को भूकंपीय जोखिम के आधार पर चार जोन्स में बांटा गया है, जिनमें हिमाचल प्रदेश सबसे खतरनाक जोन-4 और जोन-5 में आता है। जोन-5 में चम्बा, कांगड़ा, किन्नौर, लाहौल-स्पीति और शिमला के कुछ हिस्से इसमें शामिल हैं, जहां बड़े भूकंप का खतरा सर्वाधिक है। वहीं मंडी, कुल्लू, बिलासपुर, हमीरपुर, सोलन और ऊना जैसे जिले जोन-4 में आते हैं।
1905 में कांगड़ा में आया था विनाशकारी भूकंप
विशेषज्ञ जब भी हिमाचल में बड़े भूकंप की बात करते हैं, तो वे 4 अप्रैल 1905 को याद करते हैं। उस दिन कांगड़ा में रिक्टर स्केल पर 7.8 की तीव्रता का महाविनाशकारी भूकंप आया था। उस भयंकर त्रासदी में लगभग 20,000 लोगों की मौत हुई थी और कई इमारतें मलबे में तब्दील हो गई थीं।
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