हिमाचल के स्कूलों में अब पढ़ाया जाएगा हिमाचल का इतिहास और आधुनिक खेती
punjabkesari.in Monday, Mar 23, 2026 - 09:36 PM (IST)
धर्मशाला (समियाल): हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड धर्मशाला राज्य के युवाओं को अपनी मिट्टी और स्थानीय संसाधनों से जोड़ने के लिए स्कूली शिक्षा में हिमाचल का इतिहास और बागवानी को व्यावसायिक विषय के रूप में शुरू करने की तैयारी कर रहा है। इस नई योजना के तहत सबसे पहले प्रदेश के गौरवशाली इतिहास और समृद्ध संस्कृति को एक विशेष विषय के रूप में पाठ्यक्रम में शामिल करने का प्रस्ताव है, ताकि छात्र अपनी जड़ों, नदियों और परंपराओं की विस्तृत जानकारी हासिल कर सकें। इसके साथ ही प्रदेश की आर्थिकी को मजबूती देने के लिए कक्षा 9वीं से 12वीं तक बागवानी को भी दूसरे व्यावसायिक विषय के रूप में शुरू करने की योजना बनाई गई है। प्रस्तावित पाठ्यक्रम को अंतिम मंजूरी के लिए राष्ट्रीय व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद को भेजा गया है। इसे जल्द शुरू करने की तैयारी की जा रही है।
दरअसल बोर्ड को हाल ही में ड्यूल कैटेगरी का स्टेटस मिला है, जिससे उसे राज्य की भौगोलिक और आर्थिक जरूरतों के अनुरूप व्यावसायिक पाठ्यक्रम तैयार करने का अधिकार मिला है। इसी के तहत हिमाचल के गौरवशाली इतिहास और बागवानी को स्कूली स्तर पर शामिल करने का फैसला लिया गया है। हिमाचल की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से सेब, कीवी, आड़ू, पलम और नाशपाती जैसे फलों पर टिकी है। इसे ध्यान में रखते हुए बोर्ड केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि प्रैक्टीकल ट्रेनिंग पर जोर देगा। छात्रों को पाइपों में फलों की खेती जैसी आधुनिक तकनीकें सिखाई जाएंगी। इसके अलावा पौध तैयार करने, पौधों के रोग नियंत्रण और उद्यान प्रबंधन की बारीकियां भी सिखाई जाएंगी, ताकि युवा भविष्य में स्वरोजगार अपना सकें। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने इस नए पाठ्यक्रम को छात्रों की आयु और समझने की क्षमता के आधार पर 2 विशेष चरणों में विभाजित किया है।
योजना के अनुसार कक्षा 9वीं और 10वीं के विद्यार्थियों को बागवानी और प्रदेश की संस्कृति की बेसिक स्टडी (प्रारंभिक शिक्षा) करवाई जाएगी, ताकि वे कम उम्र में ही अपनी मिट्टी और गौरवशाली इतिहास की बुनियादी जानकारी हासिल कर सकें। वहीं, कक्षा 11वीं और 12वीं के छात्रों के लिए एडवांस स्टडी का प्रावधान रखा गया है। इस स्तर पर विद्यार्थियों को विषय की गहराई से जानकारी देने के साथ-साथ गहन व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। बोर्ड का उद्देश्य यह है कि स्कूली शिक्षा पूरी करने तक छात्र न केवल सैद्धांतिक रूप से सक्षम हों, बल्कि आधुनिक खेती की बारीकियों को भी अच्छी तरह समझ सकें।
मंजूरी मिली तो देश का हिमाचल बनेगा दूसरा राज्य
हिमाचल प्रदेश सरकार की इस नई योजना के तहत अब राज्य के स्कूलों में छात्रों को प्रदेश का गौरवशाली इतिहास और समृद्ध संस्कृति को एक विशेष विषय के रूप में पढ़ाया जाएगा, ताकि विद्यार्थी अपनी जड़ों से जुड़ सकें और उन्हें हिमाचल की नदियों, पहाड़ों, ऐतिहासिक स्थलों तथा स्थानीय परंपराओं की विस्तृत जानकारी मिल सके। उल्लेखनीय है कि वर्तमान में आंध्र प्रदेश देश का एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां बच्चों को उनके अपने राज्य का विशेष इतिहास पढ़ाया जाता है। यदि एनसीवीटी से इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी मिल जाती है तो हिमाचल प्रदेश अपनी विरासत से बच्चों को रू-ब-रू करवाने वाला देश का दूसरा राज्य बन जाएगा।
बोर्ड को मिला 'ड्यूल कैटेगरी' का विशेष अधिकार
यह बदलाव इसलिए संभव हो पाया है क्योंकि स्कूल शिक्षा बोर्ड को हाल ही में ड्यूल कैटेगरी का स्टेटस मिला है। इस अधिकार के मिलने से बोर्ड अब राज्य की भौगोलिक और आर्थिक जरूरतों के अनुरूप खुद के व्यावसायिक पाठ्यक्रम तैयार कर सकता है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ना और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।
धर्मशाला स्कूल शिक्षा बोर्ड अध्यक्ष डा. राजेश शर्मा का कहना है कि स्कूल शिक्षा बोर्ड ने हिमाचल के इतिहास, संस्कृति और बागवानी को नए विषय के रूप में शामिल करने का प्रस्ताव मंजूरी के लिए भेज दिया है। ड्यूल कैटेगरी स्टेटस मिलने के बाद बोर्ड अब राज्य विशेष कौशल विकास पर मुख्य रूप से फोकस कर रहा है। चूंकि हिमाचल प्रदेश में बागवानी एक मुख्य व्यवसाय है, इसलिए इसे 9वीं से 12वीं कक्षा तक शुरू करना विद्यार्थियों के भविष्य के लिए मील का पत्थर साबित होगा। हमारी योजना इसे आगामी सत्र से पूरी तरह लागू करने की है।

