Himachal: आरडीजी बंद करने पर कांग्रेस मुखर, CM के प्रधान मीडिया सलाहकार ने घेरे भाजपा नेता...पूछा ये सवाल
punjabkesari.in Tuesday, Feb 03, 2026 - 07:18 PM (IST)
शिमला (राक्टा): हिमाचल को मिलने वाले राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) को बंद किए जाने पर प्रदेश की राजनीति गर्मा गई है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने भाजपा सांसदों, नेता प्रतिपक्ष और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष से पूछा है कि वे राजनीति से ऊपर उठकर प्रदेश की जनता के समक्ष अपना रुख स्पष्ट करें कि वे हिमाचल के हितों के साथ हैं या केंद्र सरकार के उस फैसले के साथ, जिसके तहत आरडीजी को समाप्त किया गया है।
राज्य की 75 लाख जनता के साथ बहुत बड़ा अन्याय
प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में मंगलवार को आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए नरेश चौहान ने कहा कि आरडीजी को बंद किया जाना सीधे तौर पर राज्य की 75 लाख जनता के साथ बहुत बड़ा अन्याय है। देश की आजादी के बाद से ही हिमाचल जैसे भौगोलिक रूप से विषम परिस्थितियों वाले राज्यों के लिए तत्कालीन वित्त आयोगों ने राजस्व घाटा अनुदान की व्यवस्था की थी। इसका उद्देश्य ऐसे राज्यों के विकास को गति देना था, जहां आय के साधन सीमित हैं। समय-समय पर वित्त आयोग इस अनुदान को तय करता और बढ़ाता रहा है, ताकि प्रदेश अपनी बुनियादी जरूरतें और विकास कार्य पूरे कर सके।
प्रदेश को आने वाले वर्षों में हाेगा 40 से 50 हजार करोड़ रुपए का नुक्सान
नरेश चौहान ने कहा कि आरडीजी के बंद होने से प्रदेश को आने वाले वर्षों में 40 से 50 हजार करोड़ रुपए तक का नुक्सान होगा, जिसका सीधा असर जनकल्याणकारी योजनाओं, आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं और विकासात्मक निवेश पर पड़ेगा। उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि सांसद अनुराग ठाकुर जो तथ्य व आंकड़े मीडिया में दे रहे हैं, वे पूरी तरह गुमराह करने वाले हैं। नरेश चौहान ने कहा कि यह समय आरोप-प्रत्यारोप या राजनीति करने का नहीं है, बल्कि प्रदेश के अधिकारों को बचाने का है। उन्होंने भाजपा से अपील की है कि इस अहम मुद्दे पर राजनीति छोड़ सभी एकजुट होकर केंद्र सरकार से बात करें और हिमाचल के हित में राजस्व घाटा अनुदान को बहाल करवाने में प्रदेश सरकार का सहयोग करें।
प्रदेश के साथ नीतिगत अन्याय
नरेश चौहान ने कहा कि यह लड़ाई केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की है। वर्ष 1952 से लेकर अब तक केंद्र सरकार द्वारा हिमाचल को विशेष वित्तीय सहायता देने की परंपरा रही है। राजस्व घाटा अनुदान उसी परंपरा का संस्थागत स्वरूप था। इसे समाप्त करना प्रदेश के साथ नीतिगत अन्याय है।

