बिलासपुर कंज्यूमर फैडरेशन में वित्तीय अनियमितताओं का आरोप, निदेशक ने रजिस्ट्रार को सौंपी शिकायत

punjabkesari.in Thursday, Oct 29, 2026 - 10:40 PM (IST)

घुमारवीं (जम्वाल): बिलासपुर जिला सहकारी विपणन एवं उपभोक्ता फैडरेशन लिमिटेड में गंभीर प्रशासनिक, वित्तीय और परिचालन अनियमितताओं का एक बड़ा मामला सामने आया है। फैडरेशन के मनोनीत निदेशक हेम राज राव ने इस पूरे प्रकरण काे लेकर शिमला (कसुम्पटी) स्थित रजिस्ट्रार सहकारी सभाएं हिमाचल प्रदेश को एक विस्तृत शिकायत पत्र सौंपा है। इस पत्र में उन्होंने फैडरेशन के भीतर चल रही धांधलियों पर सवाल उठाते हुए मामले की एक स्वतंत्र और वैधानिक जांच की मांग की है।

अस्पताल के दवा काऊटर पर 7.80 लाख का घपला
निदेशक हेम राज राव ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि क्षेत्रीय अस्पताल बिलासपुर स्थित दवा काऊंटर पर बिना किसी लिखित आदेश के फैडरेशन चेयरमैन के बेटे पुनीत कश्यप को कैश और ऑनलाइन पेमैंट का प्रभार (चार्ज) दे दिया गया। उचित हैंडओवर प्रक्रिया न अपनाए जाने के कारण वहां लगभग 7.80 लाख रुपए के कैश और स्टॉक की कमी पाई गई। आरोप है कि इस दौरान संबंधित फार्मासिस्टों ने इस्तीफा दे दिया और जांच लंबित होने के बावजूद उनकी सिक्योरिटी राशि उन्हें वापस कर दी गई। शिकायतकर्ता के अनुसार यह प्रक्रिया बेहद संदिग्ध है और इससे फैडरेशन को भारी वित्तीय नुक्सान पहुंच सकता है।

जांच रिपोर्ट और असहमति नोट की हुई अनदेखी
हेम राज राव ने बताया कि वे स्वयं इस मामले की जांच के लिए गठित आंतरिक समिति के अध्यक्ष थे। समिति ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट चेयरमैन को सौंप दी थी। बोर्ड की बैठकों में बार-बार इस मुद्दे को उठाने के बावजूद प्रबंधन द्वारा रिपोर्ट पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। आरोप है कि मीटिंग के मिनट्स (कार्यवाही रजिस्टर) में केवल दिखावे के लिए कार्रवाई दर्ज कर दी जाती है, जबकि धरातल पर कुछ नहीं होता। इस रवैये का विरोध करते हुए निदेशक ने 18 मार्च, 12 जून और 23 जुलाई 2026 को अपने असहमति नोट भी सौंपे, लेकिन प्रबंधन ने उन्हें पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया।

दुकान किसी के नाम, चला कोई और रहा
शिकायत में यह भी खुलासा किया गया है कि फैडरेशन की एक दुकान का लगभग 1.50 लाख रुपए किराया अभी तक वसूल नहीं किया गया है। इतना ही नहीं, एक दुकान कागजों में किसी व्यक्ति को किराए पर दी गई है, लेकिन मौके पर उसे कोई अन्य व्यक्ति चला रहा है (सब-लैटिंग)। आरोप है कि बोर्ड बैठक में एक निदेशक की सिफारिश पर नियमों को ताक पर रखकर दुकान का किराया कम कर दिया गया, जो सीधे तौर पर हितों के टकराव और हिमाचल प्रदेश सहकारी अधिनियम का खुला उल्लंघन है।

21 साल बाद भी नहीं हुई 70 लाख की संपत्ति की रजिस्ट्री
सबसे गंभीर आरोप घुमारवीं में हुई लगभग 70 लाख रुपए की संपत्ति की बिक्री को लेकर है। शिकायत के अनुसार, वर्ष 2005 में 12 दुकानों वाली एक जमीन एक निजी कंपनी को बेची गई थी। हैरानी की बात यह है कि 21 साल बीत जाने के बाद भी आज तक उसकी रजिस्ट्री नहीं हुई है और कंपनी के दस्तावेज भी फैडरेशन के आधिकारिक रिकॉर्ड में मौजूद नहीं हैं। इससे जहां एक ओर सरकार को राजस्व का भारी नुक्सान हो रहा है, वहीं फैडरेशन पर भी भविष्य में भारी जुर्माना लगने की तलवार लटक रही है।

15 साल से लंबित एडवांस और फर्जी टीए बिल
इसके अलावा, शिकायत में बताया गया है कि मत्स्य फैडरेशन बिलासपुर को दिया गया 9 लाख 75 हजार रुपए का एडवांस पिछले 15 सालों से वसूल नहीं किया जा सका है। इस लंबित राशि को गलत तरीके से रिजर्व में दिखाया जा रहा है, जो अकाऊंटिंग नियमों और आरबीआई की गाइडलाइंस का सीधा उल्लंघन है। इसके साथ ही अधिकारियों के यात्रा भत्ते बिलों में भी यात्रा के समय और साधन का कोई उचित विवरण नहीं दिया जाता, जिससे फर्जीवाड़े की बू आती है।

दोषियों पर सख्त कार्रवाई की उठाई मांग
मनोनीत निदेशक हेम राज राव ने मांग की है कि फैडरेशन में हुए दवा काऊंटर घोटाले, किराए में दी गई अवैध रियायत, घुमारवीं संपत्ति सौदे और मत्स्य फैडरेशन के पैंडिंग एडवांस सहित सभी मामलों की शीघ्र एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच करवाई जाए और इसमें संलिप्त दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय कर उन पर कड़ी कार्रवाई की जाए। वहीं, इस मामले पर जब रजिस्ट्रार (बिलासपुर) भास्कर कालिया से बात की गई तो उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके स्थानीय अधिकार क्षेत्र में केवल हिमाचल सहकारी सभाएं ही आती हैं, जबकि उक्त फैडरेशन सीधे तौर पर उनके अधीन नहीं आता है।

हिमाचल प्रदेश से जुड़ी खबरें पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp group को Join करें


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Writer

Vijay

Related News