सत्ता परिवर्तन के बाद जयराम सरकार ने अपनाया नया फार्मूला

सत्ता परिवर्तन के बाद जयराम सरकार ने अपनाया नया फार्मूला

शिमला: शिक्षा में गुणात्मक सुधार लाने के लिए राज्य सरकार ने रोडमैप तैयार कर लिया है। सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा ने इसके लिए नया फार्मूला अपनाया है। इस फार्मूले के अनुसार शिक्षा के क्षेत्र में सुधार लाने के लिए राज्यपाल से लेकर निर्वाचित जनप्रतिनिधियों से सुझाव मांगे जाएंगे। इसके लिए पंचायती राज और शहरी निकाय के जनप्रतिनिधियों के अलावा सामाजिक संगठन के पदाधिकारी भी अपने सुझाव दे सकेंगे। इन सुझावों के आधार पर सरकार प्राइमरी से लेकर उच्च शिक्षा में सुधार पर ध्यान देगी।


इसके तहत पहले सरकार पहले कम संख्या वाले स्कूलों का युक्तिकरण करके उनको बंद करेगी। बंद किए जाने वाले ऐसे स्कूलों की संख्या सैंकड़ों में हो सकती है। इसमें 5 तक की संख्या वाले स्कूलों को सरकार बंद करेगी। विशेष परिस्थिति में कम संख्या वाले स्कूल बंद नहीं होंगे। प्राइमरी से लेकर कैसे उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सुधार ला सकते हैं, इस पर ध्यान दिया जाएगा। सुझावों के आधार पर सरकार स्कूली पाठ्यक्रम में भी बदलाव ला सकती है। हालांकि सरकार एकदम किसी तरह का बदलाव नहीं करेगी लेकिन आगामी शैक्षणिक सत्र से स्कूल स्तर पर कुछ न कुछ बदलाव जरूर देखने को मिलेंगे। 


प्राइमरी स्तर पर शिक्षक कम
राज्य में प्राइमरी स्तर पर इस समय शिक्षक कम हैं। इस समस्या को युक्तिकरण के तहत स्कूलों को बंद करके तथा नए शिक्षकों की भर्ती करके दूर किया जाएगा। निजी स्कूलों में प्रत्येक कक्षा के लिए कम से कम 1 शिक्षक है जबकि सरकारी स्कूल में 5 कक्षाओं के लिए 1 से 2 शिक्षक हैं। इन शिक्षकों पर स्कूली बच्चों को पढ़ाने के अलावा लिपिकीय कार्य भी करने पड़ रहे हैं। इस कारण 1 शिक्षक का अधिकांश समय इसी में बीत जाता है। प्राइमरी स्तर पर बच्चों के निजी स्कूलों में पलायन का कारण भी यही है, क्योंकि शिक्षक की कमी है और अभिभावक इसके चलते सरकारी स्कूलों को अधिक तरजीह नहीं दे रहे हैं। 


हाई और सीनियर सैकेंडरी स्कूलों में घट रहे विद्यार्थी
राज्य में हाई तथा सीनियर सैकेंडरी स्कूलों में जाने वाले बच्चों की संख्या घट रही है। वर्ष 2015-16 के दौरान जहां 3,65,863 बच्चे स्कूल पहुंचे तो वर्ष 2016-17 में यह संख्या घटकर 3,47,090 रह गई। इसमें लड़के व लड़कियां दोनों की संख्या कम हुई है। वर्ष 2015-16 में 1,87,525 लड़के स्कूल आए, वहीं वर्ष 2016-17 में यह संख्या घटकर 1,77,247 रह गई। इसके अलावा वर्ष 2015-16 में 1,78,338 लड़कियां स्कूल गईं, वहीं वर्ष 2016-17 में यह संख्या घटकर 1,69,843 रह गई।


उच्च शिक्षा ग्रहण करने वालों में छात्राएं अधिक
प्रदेश में उच्च शिक्षा यानी कॉलेज स्तर पर शिक्षा ग्रहण करने वालों में छात्राएं अधिक हैं। बीते 3 साल के आंकड़ों का अध्ययन करें तो इस अवधि में लड़कों की अपेक्षा लड़कियों ने कॉलेज का रुख अधिक किया। वर्ष 2012-13 के दौरान कॉलेज में 24,385 लड़के व 43,863 लड़कियां, वर्ष 2013-14 में 20,932 लड़के व 43,806 लड़कियां, वर्ष 2014-15 में 42,220 लड़के व 46,023 लड़कियां, वर्ष, 2015-16 के दौरान 39,466 लड़कें और 58,805 लड़कियां तथा वर्ष 2016-17 के दौरान 47,041 लड़के व 67,688 लड़कियां कॉलेज पहुंची। यानी स्कूल स्तर के बाद लड़कियां अधिक उच्च शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। 



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