सिंचाई विभाग में घोटाले को लेकर विजिलेंस ने किया प्रकरण दर्ज

7/9/2020 3:19:24 PM

शिमला/ ऊना : हिमाचल प्रदेश में फिलहाल घोटाले सामने आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग में हुए घोटाले की आंच अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि अब सिंचाई विभाग के एक घोटाला सामने आया है। विभाग में 10 लाख रुपये से बनने वाली कूहल और सिंचाई टैंक के निर्माण में गोलमाल कर फर्जी बिलों की मदद से सरकारी पैसा हड़प लिया गया। शिकायत की जांच के बाद अब विजिलेंस ने कई लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। आईजी विजिलेंस आसिफ जलाल ने एफआईआर दर्ज किए जाने की पुष्टि की है।

जानकारी के अनुसार सिरमौर के नाहन स्थित मालो वाला गांव में साल 2016 में भू संरक्षण विभाग ने सिंचाई के पानी के ढांचे के लिए 10 लाख रुपये जारी किए थे। इस राशि से कूहल और सिंचाई टैंकों का निर्माण होना था। काम पूरा करने की जिम्मेदारी कृषि विकास संघ को दी गई। संघ ने काम पूरा कर जारी बजट को खर्च कर दिया। इसके बाद स्थानीय लोगों ने विजिलेंस में शिकायत की कि निर्माण कार्य में भारी अनियमितता और फर्जी बिलों को लगाकर पूरी राशि हड़प ली गई है। विजिलेंस ब्यूरो के अधिकारियों ने प्रारंभिक जांच शुरू की तो शिकायती पत्र में लगाए गए आरोप सही निकले। आरोप सही मिलने पर ब्यूरो ने सरकार की अनुमति लेकर मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है। मामले में कृषक विकास संघ के प्रधान के अलावा अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है। 

विजिलेंस ऊना ने वर्ष 2011 -2013 में वाटर शेड कमेटी बहडाला द्वारा करवाए गए सिंचाई चैनलों के कार्य में हुए घोटाले में वाटर शेड कमेटी के खिलाफ आईपीसी की धारा 409, 406, 467, 468, 471 व भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 के अंतर्गत एफआईआर दर्ज की है। सोनिया राणा जो वर्तमान में बहडाला पंचायत की प्रधान है, वह इस वाटर शेड कमेटी की प्रधान थी। वाटर शेड कमेटी द्वारा तैयार रिकॉर्ड के अनुसार तीन लाख, दो लाख तथा एक लाख के तीन सिंचाई चैनल बनाए गए थे। लेकिन विजिलेंस द्वारा जांच किए जाने पर मौका पर केवल एक ही चैनल 2 लाख वाला पाया गया है। इस प्रकार वाटर शेड कमेटी द्वारा चार लाख रुपए का घोटाला किया जाना पाया जा रहा है। मुख्य अभियुक्त सोनिया राणा तथा बीडीओ ऑफिस के दोनों जेईएस ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट से अंतरिम जमानत करवाई है।
 


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prashant sharma

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