Una: देहलां की कारवां कौशल यूरोप की स्लोवाकिया स्थित टॉप यूनिवर्सिटी में बनेगी रिसर्च साइंटिस्ट
punjabkesari.in Thursday, May 07, 2026 - 08:17 PM (IST)
भारत को करना चाहती है डायबिटीज मुक्त, शुरू से रही है पढ़ाई में टॉपर, मिली स्कॉलरशिप
ऊना (सुरेन्द्र शर्मा): जिले के तहत गांव लोअर देहलां के कृषक की बेटी ने यूरोप के विख्यात विश्वविद्यालयों में से एक स्लोवाकिया स्थित कोमेनियस यूनिवर्सिटी में रिसर्च साइंटिस्ट के रूप में प्रवेश किया है। चंडीगढ़ स्थित सीएसआईआर, सीएसआईएसओ रिसर्च लैब से पीएच.डी. करने के बाद उनका चयन स्लोवाकिया के अग्रणी विश्वविद्यालय में हुआ है। यह विश्वविद्यालय चिकित्सा विज्ञान और मानविकी जैसे विषयों पर उच्च डिग्री प्रदान करता है।
कोमेनियस विश्वविद्यालय सलोवाकिया की राजधानी ब्रातिस्लावा में स्थित एक प्रमुख और सबसे पुराना उच्च शिक्षण संस्थान है। गांव देहलां के पुष्पिंदर और मीना कुमारी की पुत्री कारवां कौशल ने पहली से 12वीं तक की शिक्षा एसएमवीपी स्कूल जखेड़ा से की। उसके बाद उन्हें उच्च शिक्षा के लिए डीएसटी इंस्पायर स्कॉलरशिप मिली। एसवीएसडी कालेज भटोली से फिजिक्स में ऑनर की डिग्री हासिल की।
उसके उपरांत पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला से फिजिक्स में मास्टर ऑफ फिजिक्स की। शिक्षा में शानदार प्रदर्शन के चलते कारवां कौशल को कई विश्वविद्यालयों से ऑफर लैटर मिले, लेकिन उन्होंने इसके लिए स्लोवाकिया स्थित कोमेनियस यूनिवर्सिटी को चुना।
पिता पुष्पिंदर कौशल को दिया सफलता का श्रेय
देहलां गांव की बेटी कारवां अपनी सफलता का श्रेय पिता पुष्पिंदर कौशल को देती हैं, जिन्होंने उनका उत्साहवर्धन किया और हर मौके पर आगे बढ़ने का साहस प्रदान किया। उनका कहना है कि उनके पिता कृषक हैं और मां गृहिणी हैं। आय के अधिक साधन न होने के बावजूद पिता ने कभी धन की कमी आड़े नहीं आने दी। भले ही वह कृषक हैं लेकिन हमेशा उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित किया। कारवां कहती हैं कि उनकी इस सफलता के पीछे उनके पिता हैं।
कारवां कहती हैं कि उनका चयन यूके और स्वीडन के कई विख्यात विश्वविद्यालयों के लिए भी हुआ लेकिन उन्होंने स्लोवाकिया की यूनिवर्सिटी को चुना, क्योंकि उसकी रैंकिंग सबसे अधिक है। कारवां कहती हैं कि भविष्य में वह एक ऐसी वैज्ञानिक बनना चाहती हूं जो भारत को मधुमेय यानी डायबिटीज मुक्त कर पाए। देश में जिस प्रकार से डायबिटीज के मामले बढ़ रहे हैं, ऐसे में इस प्रकार के शोध करना चाहती हैं जिससे इस महामारी से मुक्त हुआ जा सके।

