शिमला के चलौंठी में फिर धंसा हाईवे, भारी मशीनरी गड्ढे में समाई, घरों में भी आई दरारें
punjabkesari.in Tuesday, Feb 03, 2026 - 12:18 PM (IST)
हिमाचल डेस्क। जिसे विकास का मार्ग कहा जा रहा था, वह अब स्थानीय निवासियों के लिए विनाश की आहट बनता जा रहा है। शिमला के चलौंठी क्षेत्र में फोरलेन टनल निर्माण की वजह से धंसती जमीन ने आज उस वक्त रोंगटे खड़े कर दिए, जब काम में जुटी एक भारी-भरकम मशीन अचानक गहरे गड्ढे में समा गई। यह हादसा विकास की रफ्तार और सुरक्षा के दावों के बीच एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर गया है।
सड़क निर्माण के दौरान अचानक धरती फटी और निर्माणाधीन टनल के ऊपर एक बड़ा क्रेटर (गड्ढा) बन गया। देखते ही देखते कंपनी की मशीनरी उसमें समा गई। राहत की बात यह रही कि पास ही रखा भारी जनरेटर गिरने से बच गया, वरना हादसा और भी भयावह हो सकता था।
घटना की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम ग्रामीण ने तुरंत मोर्चा संभाला और एहतियात के तौर पर बाईपास मार्ग पर वाहनों की आवाजाही को पूरी तरह रोक दिया। हालांकि मशीन को बाहर निकाल लिया गया है, लेकिन सड़क का एक हिस्सा धंसने से आगामी कई दिनों तक जनता को भीषण ट्रैफिक जाम और आवागमन की बाधाओं से जूझना होगा।
दरकती दीवारें और बेबस लोग
यह कोई पहली चेतावनी नहीं है। करीब तीन हफ्ते पहले भी इसी इलाके के मकानों में गहरी दरारें देखी गई थीं, जिसके बाद से ही स्थानीय लोग दहशत के साये में जीने को मजबूर हैं। आरोप है कि टनल के भीतर हो रहे अनियंत्रित विस्फोट (Blasting) की धमक से ऊपर बने रिहायशी ढांचे कमजोर हो रहे हैं।
जनवरी की घटना: बीते 9 जनवरी को भी विस्फोटों के कारण कई इमारतों पर खतरा मंडराया था।
पलायन की मजबूरी: स्थिति इतनी विकराल हो गई कि शुक्रवार रात को एक बहुमंजिला इमारत को आनन-फानन में खाली कराना पड़ा।
कंपनी की कार्यप्रणाली पर आक्रोश
स्थानीय जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर है। निवासियों का आरोप है कि निर्माण कंपनी सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर काम कर रही है। बार-बार आगाह करने और घरों में दरारें आने के बावजूद कंपनी ने अपनी कार्यशैली में कोई बदलाव नहीं किया, जिसका नतीजा आज इस बड़े भू-धंसाव के रूप में सामने आया है।
प्रशासनिक कार्रवाई: प्रशासन ने पूरे क्षेत्र का तकनीकी सर्वे शुरू कर दिया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कितने घर रहने लायक बचे हैं और भविष्य में ऐसे खतरों को कैसे रोका जा सकता है।

