हिमाचल में तापमान बढ़ा: बागवानों की बढ़ी चिंता, फलों की पैदावार पर संकट के बादल!
punjabkesari.in Friday, Feb 13, 2026 - 06:59 PM (IST)
Shimla News: हिमाचल प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में दिन का तापमान सामान्य से काफी ऊपर रहने से सुखद मौसम का एक और दौर देखने को मिल रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र, शिमला के अनुसार पिछले 24 घंटों के दौरान मौसम शुष्क रहा और कहीं भी वर्षा या हिमपात दर्ज नहीं किया गया। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि पौधों की जल्द सुप्तावस्था टूटने से क्षेत्र में पैदावार और फलों की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
न्यूनतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं
मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, कई केंद्रों पर रात का तापमान सामान्य से दो से पांच डिग्री अधिक रहा, लेकिन न्यूनतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ। वहीं अधिकांश स्थानों पर अधिकतम तापमान मौसमी औसत से तीन से सात डिग्री तक अधिक बना रहा। नेरी में राज्य का सर्वाधिक अधिकतम तापमान 26.7 डिग्री दर्ज किया गया, इसके बाद मंडी में 26.2 डिग्री, ऊना और पांवटा साहिब में 26.0 डिग्री तथा कांगड़ा में 25.0 डिग्री तापमान रहा। पहाड़ी पर्यटन स्थलों में भी दोपहर असामान्य रूप से गर्म रही, जहां शिमला में 19.4 डिग्री, धर्मशाला में 22.0 डिग्री और मनाली में 17.6 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। हिमाचल प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मुख्य स्टेशनों, हवाई अड्डे और प्रमुख पर्यटन स्थलों पर न्यूनतम तापमान अपेक्षाकृत सुहावने रात्रि मौसम को दर्शाता है। न्यूनतम तापमान के आंकड़ों पर नजर डालें तो शिमला में 8.5 डिग्री, सुंदरनगर में 6.5 डिग्री, भुंतर में 5.4 डिग्री, धर्मशाला में 6.4 डिग्री, ऊना में 8.2 डिग्री, नाहन में 9.7 डिग्री, पालमपुर में 8.0 डिग्री, सोलन में 5.0 डिग्री, कांगड़ा में 8.8 डिग्री, मंडी में 7.7 डिग्री और बिलासपुर में 7.5 डिग्री दर्ज किया गया।
कृषि विशेषज्ञों ने सर्दियों के बदलते स्वरूप पर चिंता की व्यक्त
राज्य में सबसे कम न्यूनतम तापमान ताबो में शून्य से नीचे 8.0 डिग्री दर्ज किया गया। प्रमुख पर्यटन स्थलों और महत्वपूर्ण स्थानों में न्यूनतम तापमान मनाली में 5.1 डिग्री सेल्सियस, सराहन में 4.2 डिग्री सेल्सियस और सेओबाग में 2.8 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। एक अन्य महत्वपूर्ण उच्च ऊंचाई वाले पर्यटन स्थल कल्पा में 1.5 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। शिमला के पास स्थित जुब्बरहट्टी हवाई अड्डे पर न्यूनतम तापमान 9.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। उच्च जनजातीय क्षेत्रों में न्यूनतम तापमान शून्य से नीचे रहा, जिससे इन क्षेत्रों में सामान्य शीतकालीन ठंडक बरकरार रही। कृषि विशेषज्ञों ने सर्दियों के बदलते स्वरूप पर चिंता व्यक्त की है। दिन के तापमान में अचानक वृद्धि, विशेष रूप से जब फरवरी के मध्य में तापमान 15 डिग्री से ऊपर चला जाता है, तो सेब के बागानों और अन्य समशीतोष्ण फलों की फसलों में समय से पहले सुप्तावस्था टूट सकती है।
16 फरवरी से बदलेगा मौसम
सुप्तावस्था एक महत्वपूर्ण चरण है जो कलियों के सही विभेदन, फूल आने और फल लगने के लिए आवश्यक है। यदि पौधे समय से पहले सुप्तावस्था से बाहर आ जाते हैं तो इससे पैदावार और फलों की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। किसानों और बागवानों को मौसम की स्थिति पर बारीकी से नज़र रखने और जहां संभव हो सुरक्षात्मक उपाय अपनाने की सलाह दी जा रही है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि तापमान में अचानक उतार-चढ़ाव वाला यह मौसम राज्य की बागवानी आधारित अर्थव्यवस्था के लिए दीर्घकालिक जलवायु और आर्थिक चुनौतियां पैदा करता है। पूर्वानुमान के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक मौसम शुष्क रहेगा लेकिन 16 फरवरी से एक नया ‘पश्चिमी विक्षोभ' पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है।

