प्रदेश में शिक्षा के नाम पर करोड़ों के डाके पर सरकार की चुप्पी शक के घेरे में : राणा

8/12/2020 5:39:31 PM

हमीरपुर : राज्य कांग्रेस उपाध्यक्ष एवं विधायक राजेंद्र राणा ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि लग रहा है कि मानव भारती विश्वविद्यालय घोटाले में संलिप्त कुछ लोगों को सरकार बचाने के प्रयासों में लगी है। नई जानकारी निकल कर यह आई है कि अब जांच में लगी एसआईटी की टीम को भी बदल दिया गया है। ऐसा लग रहा है कि करोड़ों के इस भ्रष्टाचार मामले में चर्चा में आई कुछ बड़ी मछलियों व मगरमच्छों के फंसने के खौफ से सरकार इस मामले को ठंडे बस्ते में डालना चाह रही है। उन्होंने सवाल खड़ा किया है कि अगर सरकार की नीयत व मंशा भ्रष्टाचार के मामले को लेकर साफ है तो फिर सरकार इस मामले की जांच ईडी व सीबीआई को सौंपने से गुरेज क्यों कर रही है? भ्रष्टाचार के इस मामले में पीड़ित व प्रताड़ित कई युवाओं ने जानकारी दी है कि इस मामले का शिक्षा माफिया सरगना ने अपने परिवार व भ्रष्टाचार से कमाए करोड़ों का धन जांच के खौफ से विदेशों में भेज दिया है व इसी बीच भ्रष्टाचार से कमाए करोड़ों के अकूत खजाने को भी विदेश भेजा है। स्वाभाविक तौर पर यह मामला ईडी और सीबीआई की जांच का बनता है, लेकिन प्रदेश सरकार हाथ पर हाथ धरे इस मामले में अभी तक तमाशबीन बन कर बैठी है। 

स्टेट रेगुलेटरी कमीशन के तहत आती इस युनिवर्सिटी के खिलाफ रेगुलेटरी कमीशन भी कोई कार्रवाई नहीं कर पाया है। मानव भारती युनिवर्सिटी के बाद राजस्थान में माधव युनिवर्सिटी बनाकर इस माफिया सरगना ने भ्रष्टाचार के अलग-अलग तरीके अपनाते हुए लाखों परिवारों के हितों पर डाका डाला है। मानव भारती युनिवर्सिटी से बेची गई कई डिग्रियों पर ड्राइवरों तक के साईन करवाए गए हैं। 2018 में महाराष्ट्र पूणे के सांसद ने मानव भारती युनिवर्सिटी से जारी हुई 2 जाली डिग्रियों का मामला लोकसभा में उठाया था, लेकिन अफसोस यह है कि हिमाचल के हितों की पैरवी का दावा करने वाले प्रदेश के सांसद इस फर्जीवाड़े पर पूरी तरह खामोश हैं। इसी फर्जीवाड़े में मानव भारती युनिवर्सिटी जांच की जद में आने के बाद व डिग्रियों के धंधे में करोड़ों डकारने के बाद अपनी ही फर्जी डिग्रियों से मुकरी है कि यह डिग्रियां उनकी युनिवर्सिटी द्वारा जारी नहीं की गई हैं। 

करोड़ों के इस फर्जीवाड़े की जांच में जून के पहले हफ्ते को अंतरिम जमानत हुई व 19 जून को फिर हाईकोर्ट ने आरोपों की गंभीरता को देखते हुए इसकी बेल रद्द की है। 19 जून को ही कोर्ट के आदेश पर इस मामले का फॉरेंसिंक ऑडिट करवाने के आदेश हुए हैं। हैरानी यह है कि प्रदेश में करोड़ों का फर्जीवाड़ा होने के बावजूद भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस के जुमले बोलने वाली सरकार इस मामले पर पूरी तरह खामोश है। जो यह शक और संदेह जाहिर कर रहा है कि इस मामले में सरकार कोई कार्रवाई नहीं करना चाहती है। जिस कारण से इस मामले पर बड़े स्तर पर मिली भगत के आरोपों से इन्कार नहीं किया जा सकता है।
 


Edited By

prashant sharma

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