Shimla: पर्यटन विकास निगम कार्यालय धर्मशाला स्थानांतरित करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज
punjabkesari.in Saturday, Sep 19, 2026 - 10:33 PM (IST)
शिमला (मनोहर): हाईकोर्ट ने हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम के मुख्य कार्यालय को शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित करने के फैसले को चुनौती देने वाली दोनों याचिकाओं को कॉस्ट स्थित खारिज कर दिया। मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश बीसी नेगी की खंडपीठ ने कहा कि पॉलिसी से जुड़े फैसलों के अलावा, याचिका में उठाए गए मुद्दों से साफ पता चलता है कि याचिकाकर्त्ताओं के पास याचिका दायर करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कोर्ट के आदेश के तहत 50,000-50,000 रुपए जमा किए थे।
यह रकम उनकी ईमानदारी परखने और यह तय करने के लिए जमा करवाई गई थी कि क्या इसमें सचमुच जनहित याचिका वाला कोई पहलू शामिल है या नहीं। इसलिए इस जनहित याचिका के स्वीकार्य होने पर सवाल उठता है। एक मामले में, याचिकाकर्त्ता दाबे राम एक रिटायर्ड कर्मचारी है, जो पहले हिमाचल प्रदेश टूरिज्म इम्प्लाइज रजिस्टर्ड यूनियन का प्रैजीडैंट रह चुका है। इसका मतलब है कि संगठन के साथ उसका औपचारिक रिश्ता खत्म हो चुका है, इसलिए उसके पास अभी काम कर रहे कर्मचारियों का पक्ष रखने का कोई अधिकार नहीं है।
दूसरे मामला, जो मुकेश भारद्वाज बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य और अन्य में भी याचिकाकर्त्ता अब नौकरी में नहीं हैं। नतीजतन, ऐसा लगता है कि ये याचिकाएं दूसरे लोगों के कहने पर दायर की गई हैं। इनका इस्तेमाल कानूनी कार्रवाई शुरू करने या ऐसे लोगों का पक्ष रखने के लिए नहीं किया जा सकता, जिनके पास असल में कानूनी कार्रवाई का सही आधार हो सकता है। कोर्ट ने कहा कि इन याचिकाओं को स्वीकार नहीं किया जा सकता और इन्हें खारिज किया जाता है। दोनों याचिकाकर्त्ता द्वारा जमा की गई 50,000 रुपए की राशि प्रदेश हाईकोर्ट बार एसोसिएशन और हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट स्टाफ वैल्फेयर ऑर्गेनाइजेशन के बीच बराबर-बराबर बांट दी जाए।

