शिमला के ''राष्ट्रपति निवास'' की बदहाली पर हाईकोर्ट सख्त, केंद्रीय शिक्षा विभाग को लगाई फटकार

punjabkesari.in Friday, Jul 17, 2026 - 03:25 PM (IST)

शिमला (मनोहर): हाईकोर्ट ने शिमला स्थित ऐतिहासिक धरोहर 'भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान' (इंडियन इंस्टीच्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज), जिसे 'राष्ट्रपति निवास' या 'वाइसरीगल लॉज' के नाम से भी जाना जाता है, की खस्ता हालत पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने पाया कि इसे तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एस. राधाकृष्णन द्वारा शैक्षणिक कार्यों के लिए सौंपा गया था। इसके बाद इसके रखरखाव में की गई उदासीनता सिर्फ केंद्रीय शिक्षा विभाग की लापरवाही को दिखाता है, जो इस बिल्डिंग को मैंटेन करने की अपनी जिम्मेदारी निभाने में नाकाम रहा है। मुख्य न्यायाधीश जी.एस. संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन सी. नेगी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए इसे बेहद चिंताजनक स्थिति माना है। कोर्ट के आदेश पर जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण शिमला के सचिव द्वारा किए गए जमीनी निरीक्षण में इस ऐतिहासिक इमारत की बदहाली के चौंकाने वाले सबूत मिले। मुख्य सार्वजनिक प्रवेश द्वार का रखरखाव बेहद खराब पाया। इमारत की दीवारों में कई जगह गंभीर दरारें आ चुकी हैं। छतें, सीढ़ियां, रेलिंग और फर्श पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो रहे हैं।

अदालत के सामने पेश किए गए हलफनामे से पता चला है कि साल 1888 में बनने के बाद से इस इमारत की कभी कोई बड़ी मुरम्मत नहीं की गई। कोर्ट को बताया गया कि साल 2019 में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा इसकी मुरम्मत के लिए 66.38 करोड़ के संशोधित बजट को मंजूरी दी गई थी। सबसे पहले रसोईघर (किचन विंग) के जीर्णोद्धार का काम अगस्त 2020 में शुरू किया गया था, जिस पर 6.49 करोड़ खर्च हो चुके हैं। हालांकि, अगस्त 2025 तक इसका केवल 68 प्रतिशत काम ही पूरा हो पाया है। हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह सीपीडब्ल्यूडी, भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की ओर से अलग से विस्तृत हलफनामा दायर करें।

कोर्ट ने विशेष रूप से यह जानकारी मांगी है कि इस ऐतिहासिक भवन से हटाए गए प्राचीन हथियारों और कलाकृतियों की क्या कोई सूची बनाई गई थी? उन्हें हटाने के बाद वर्तमान में कहां सुरक्षित स्थापित किया गया है, इसका पूरा ब्यौरा मांगा गया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट को यह भी सूचित किया गया कि शिमला के ऐतिहासिक मॉल रोड के लिए एक समान हैरिटेज डिजाइन और कार्यान्वयन ढांचा तैयार करने के लिए परामर्श सेवाओं का टैंडर जारी कर दिया गया है। इस मामले की अगली सुनवाई अब 20 अगस्त 2026 को तय की गई है।


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Content Writer

Kuldeep

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