Shimla: पंचायती राज चुनावों में पहली बार 2 दिन मिलेगा नाम वापसी का समय
punjabkesari.in Tuesday, May 12, 2026 - 06:22 PM (IST)
शिमला (भूपिन्द्र): राज्य चुनाव आयोग ने पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों में इस बार एक बड़ा बदलाव किया है। इसके तहत पहली बार प्रत्याशियों को नामांकन पत्र वापस लेने के लिए 2 दिन का समय दिया गया है। अभी तक पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों में नाम वापसी के लिए केवल एक दिन निर्धारित होता था, लेकिन इस बार आयोग ने 14 व 15 मई को नाम वापसी की तिथि तय की है। राजनीतिक हलकों में इस फैसले को काफी अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इससे राजनीतिक दलों और स्थानीय नेताओं को बागी उम्मीदवारों को मनाने तथा चुनावी समीकरण साधने के लिए अतिरिक्त समय मिल जाएगा। हालांकि पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव पार्टी चुनाव चिह्न पर नहीं लड़े जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद राजनीतिक दल इन चुनावों में पूरी सक्रियता से भाग लेते हैं। विशेषकर जिला परिषद और पंचायत समिति सीटों पर राजनीतिक दल अपने समर्थित उम्मीदवार को मैदानों में उतारते हैं और कोशिश रहती है कि एक ही विचारधारा से जुड़े कई उम्मीदवार चुनाव मैदान में न रहें।
इस बार जिला परिषद सीटों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां पहले से अधिक तेज नजर आ रही हैं। कई क्षेत्रों में राजनीतिक दलों ने अपने समर्थित उम्मीदवारों की अनौपचारिक घोषणा तक कर दी है। इसके चलते कई स्थानों पर एक ही दल से जुड़ेे एक से अधिक दावेदार मैदान में उतर आए हैं। ऐसे में अब अतिरिक्त एक दिन मिलने से नेताओं को असंतुष्ट उम्मीदवारों को मनाने और चुनावी नुक्सान को कम करने का अवसर मिलेगा। पंचायती राज चुनाव भले ही गैरदलीय आधार पर होते हों, लेकिन जमीनी स्तर पर इनमें राजनीतिक दलों की सक्रिय भूमिका रहती है। जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों में दल अपनी ताकत दिखाने का प्रयास करते हैं। यही कारण है कि पार्टी का समर्थन नहीं मिलने पर कई कार्यकर्त्ता निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला कर लेते हैं। ऐसे में दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बगावत रोकने की होती है।
डैमेज कंट्रोल में जुटे पार्टी नेता
उधर नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब कई क्षेत्रों में राजनीतिक दलों के नेता डैमेज कंट्रोल में जुट गए हैं। पार्टी नेता लगातार बैठकों और संपर्क अभियान के जरिए असंतुष्ट दावेदारों को मनाने का प्रयास कर रहे हैं। अब 2 दिन का समय मिलने से इन प्रयासों को और मजबूती मिलने की संभावना है। अतिरिक्त समय मिलने से कई सीटों पर मुकाबले की तस्वीर बदल सकती है। यदि दल बागी उम्मीदवारों को मनाने में सफल रहते हैं तो कई स्थानों पर सीधा मुकाबला देखने को मिल सकता है। वहीं यदि असंतोष बना रहता है तो चुनावी समीकरण पूरी तरह से बदल सकते हैं।

