Shimla: लाहौल-स्पीति और पांगी में पंचायती राज संस्थाओं को भंग करने की अधिसूचना पर रोक
punjabkesari.in Wednesday, Jul 01, 2026 - 10:50 PM (IST)
शिमला (मनोहर): हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को एक बड़ा झटका देते हुए जनजातीय क्षेत्रों की पंचायती राज संस्थाओं को समय से पहले भंग करने के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने साफ किया है कि चुने हुए प्रतिनिधियों के पास अपना 5 वर्ष का कार्यकाल पूरा करने का कानूनी अधिकार है। मुख्य न्यायाधीश जी.एस. संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने दीपक चौहान व अन्य प्रतिनिधियों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। इसके साथ ही अदालत ने मौजूदा प्रतिनिधियों को अगले आदेश तक अपने पदों पर कार्य जारी रखने की मंजूरी दे दी है।
कोर्ट ने राज्य सरकार की 24 जून 2026 की उस अधिसूचना को स्थगित कर दिया है, जिसके तहत लाहौल-स्पीति के केलांग और चम्बा के पांगी उपमंडल की ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों को तुरंत प्रभाव से भंग कर दिया गया था। याचिकाकर्त्ताओं की ओर से दलील दी गई कि मौजूदा पंचायतों का 5 साल का कार्यकाल 17 अक्तूबर 2026 तक निर्धारित है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार मई 2026 में ही नए चुनाव करवा लिए गए थे, लेकिन इसके आधार पर पुराने प्रतिनिधियों के कार्यकाल को जबरन छोटा नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार ने पहले 6 जून 2026 को खुद माना था कि इन उपरोक्त संस्थाओं के नवनिर्वाचित प्रतिनिधियों की पहली बैठक 18 अक्तूबर 2026 को होगी। इसके बाद अचानक 24 जून को अधिसूचना बदलकर बैठक को 27 जून तय कर दिया गया, जो कि मौजूदा प्रतिनिधियों के अधिकारों का हनन है। हाईकोर्ट ने इस मामले में सभी प्रतिवादियों और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 12 अगस्त 2026 को तय की गई है, तब तक केलांग और पांगी के प्रभावित क्षेत्रों में पुराने जनप्रतिनिधि ही अपने पदों का कार्यभार संभालेंगे।

