Shimla: कड़े फैसले रहेंगे जारी, आत्मनिर्भर हिमाचल की परिकल्पना : सुक्खू
punjabkesari.in Saturday, Mar 21, 2026 - 09:18 PM (IST)
शिमला (राक्टा): मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने जो बजट पेश किया गया है, वह साधारण बजट नहीं है, ये उस अनुभव का एक सार है, जो हिमाचल प्रदेश की जनता को चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट आत्मनिर्भर हिमाचल की परिकल्पना है। उन्होंने कहा प्रदेश में विपक्षी दल भाजपा हिमाचल विरोधी पार्टी बन चुकी है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शनिवार को बजट पेश करने के बाद आयोजित पत्रकार वार्ता में यह आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कहा कि आरडीजी बंद होने के चलते बजट का आकार कम हुआ है।
आरडीजी बंद होने पर नेता प्रतिपक्ष सहित अन्य भाजपा नेताओं से बात की गई थी और वह उनके नेतृत्व में दिल्ली जाने को भी वह तैयार थे लेकिन ये जाने को तैयार नहीं। उन्होंने कहा कि आरडीजी प्रदेश की जनता का अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा का एकमात्र एजैंडा सरकार का विरोध करना है और मुख्यमंत्री के खिलाफ सोशल मीडिया पर प्रचार करना है।
बजट में ग्रामीण अर्थव्यवस्था, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में कोई कटौती नहीं की गई है। सरकार ने 3 शहर बनाने की कल्पना की है। हमारे लोग जीरकपुर, पंचकूला व चंडीगढ़ जाते हैं, वहां फ्लैट खरीदते हैं। ऐसे में हिम चंडीगढ़ सिटी के लिए 10 हजार बीघा भूमि हाऊसिंग बोर्ड के नाम कर दी है। 10-10 हजार बीघा के 3 शहर बनाए जाएंगे। ये वर्ल्ड क्लास सिटी बनेगी, इससे प्रदेश की आर्थिकी में वृद्धि होगी, जिससे किसी अन्य पर निर्भर रहना नहीं पड़ेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान वित्तीय स्थिति को देखते हुए अधिकारियों के वेतन में अस्थायी कट लगाया गया है, लेकिन जिनकी आय सीमित है, चाहे क्लास थ्री या क्लास फोर श्रेणी के कर्मचारी हो या फिर पैंशनर्ज हों, उनके वेतन व पैंशन में किसी प्रकार का कट नहीं लगाया है। उन्होंने कहा कि सरकार 6 माह के कड़े फैसले लेगी और प्रयास रहेगा कि आत्मनिर्भर प्रदेश की जो नींव पड़ चुकी है, उसको मजबूत किया जाए।
राजनीतिक लाभ नहीं, प्रदेश हित सर्वोपरि
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार जो फैसले ले रही है, वह किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि वह प्रदेश की जनता के हित में लिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि आरडीजी बंद न हुई होती तो बजट और अधिक जनहितकारी हो सकता था। बावजूद इसके, सरकार ने सीमित संसाधनों में भी बेहतर काम करने का प्रयास किया है और लगभग 10 हजार करोड़ रुपए के वित्तीय दबाव के बीच संतुलन बनाया है। बजट में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने के लिए प्राकृतिक खेती, पशुपालन, मत्स्य पालन और स्वरोजगार योजनाओं पर जोर दिया गया है।

