Shimla: धर्मशाला में 19 करोड़ से बनेगा प्रदेश का पहला रिमोट सैंसिंग केंद्र
punjabkesari.in Saturday, Jul 04, 2026 - 04:05 PM (IST)
शिमला (भूपिन्द्र): प्रदेश में कृषि क्षेत्र को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए धर्मशाला में राज्य का पहला रिमोट सैंसिंग एवं डैमोग्राफिक इन्फॉर्मेशन सिस्टम केंद्र स्थापित किया जाएगा। करीब 19 करोड़ रुपए की लागत वाली यह परियोजना केंद्र सरकार के सहयोग से स्थापित होगी। इसके माध्यम से कृषि विभाग अत्याधुनिक तकनीक के जरिए मौसम, भूमि, फसल और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां एकत्र करेगा तथा विभिन्न सरकारी विभागों को आवश्यक डिजिटल डेटा उपलब्ध करवाएगा।
यह परियोजना प्रदेश में कृषि क्षेत्र के डिजिटलीकरण और वैज्ञानिक प्रबंधन की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। इसे धर्मशाला में स्थापित किया जाएगा, जिसके लिए भूमि से संबंधित औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। यह केंद्र हिमाचल प्रदेश का पहला रिमोट सैंसिंग केंद्र होगा, जिससे कृषि विभाग की कार्यप्रणाली अधिक प्रभावी और तकनीक आधारित बनेगी। इस प्रणाली से प्राप्त आंकड़े केवल कृषि विभाग तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि वन विभाग और ग्रामीण विकास विभाग सहित अन्य सरकारी विभागों को भी उपलब्ध करवाए जाएंगे।
इससे विभिन्न विकास योजनाओं की बेहतर योजना तैयार करने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों के प्रभावी क्रियान्वयन में सहायता मिलेगी। इसके स्थापित होने के बाद कृषि विभाग मौसम संबंधी जानकारी, फसलों की स्थिति, भूमि उपयोग तथा अन्य आवश्यक आंकड़े स्वयं एकत्र करेगा। इससे किसानों को समय पर वैज्ञानिक सलाह उपलब्ध करवाना भी आसान होगा और प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति में त्वरित निर्णय लेने में सहायता मिलेगी। विभिन्न विभागों के बीच डेटा सांझा करने की व्यवस्था मजबूत होगी, जिससे योजनाओं के निर्माण और क्रियान्वयन में पारदर्शिता तथा गति आएगी।
कर्मचारियों को उपलब्ध करवाए जाएंगे आधुनिक आवश्यक तकनीकी उपकरण : प्रो. चंद्र कुमार
कृषि मंत्री प्रो. चंद्र कुमार ने कहा कि प्रदेश सरकार कृषि विभाग को पूरी तरह हाईटैक बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी कड़ी में धर्मशाला में रिमोट सैंसिंग एवं डैमोग्राफिक इन्फॉर्मेशन सिस्टम स्थापित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि रिमोट सैंसिंग केंद्र में कार्यरत कर्मचारियों को आधुनिक कम्प्यूटर, लैपटॉप तथा अन्य आवश्यक तकनीकी उपकरण उपलब्ध करवाए जाएंगे। सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि कर्मचारियों के पास कार्य करने के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हों, ताकि तकनीकी सुविधाओं के अभाव का कोई बहाना न बनाया जा सके और परियोजना का संचालन पूरी दक्षता के साथ किया जा सके।

