Shimla: डिपो धारक ''वर्कमैन'' है या नहीं, यह तय करना लेबर कमिश्नर का काम नहीं : हाईकोर्ट

punjabkesari.in Thursday, Jul 16, 2026 - 09:16 PM (IST)

शिमला (मनोहर): हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक फैसले में स्पष्ट किया है कि कोई व्यक्ति औद्योगिक विवाद अधिनियम के तहत 'वर्कमैन' (श्रमिक) की श्रेणी में आता है या नहीं, इसका फैसला करने का अधिकार डिप्टी लेबर कमिश्नर के पास नहीं है। यह पूरी तरह से लेबर कोर्ट या इंडस्ट्रियल ट्रिब्यूनल के अधिकार क्षेत्र में आता है। न्यायाधीश ज्योत्स्ना रिवाल दुआ की एकल पीठ ने याचिकाकर्त्ता जैसी राम (उर्फ जय सिंह) की याचिका को स्वीकार करते हुए डिप्टी लेबर कमिश्नर के पुराने आदेश को रद्द कर दिया है। याचिकाकर्त्ता जैसी राम को मंडी जिले के जोगिंद्रनगर के शेरपुर गांव में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत उचित मूल्य की दुकान (डिपो) चलाने के लिए अधिकृत किया था। याचिकाकर्त्ता का कोई औद्योगिक विवाद था, जो सुलह अधिकारियों की कोशिशों के बाद भी नहीं सुलझ सका। इसके बाद जोगिंद्रनगर के लेबर इंस्पैक्टर ने इस मामले की रिपोर्ट हिमाचल प्रदेश के डिप्टी लेबर कमिश्नर को भेज दी।

डिप्टी लेबर कमिश्नर ने 15 जून 2018 को एक आदेश जारी कर विवाद को लेबर कोर्ट भेजने से इनकार कर दिया। उन्होंने तर्क दिया कि जैसी राम एक अधिकृत डिपो धारक हैं, इसलिए वह कानून की धारा 2(एस) के तहत 'वर्कमैन' की परिभाषा में नहीं आते। हाईकोर्ट ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के 'टेल्को कॉन्वॉय ड्राइवर्स मजदूर संघ बनाम बिहार राज्य' मामले का हवाला दिया। सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार, सरकार या प्रशासनिक अधिकारियों का काम केवल यह देखना है कि कोई विवाद अस्तित्व में है या नहीं। अधिकारी खुद ही मामले के गुण-दोष की जांच नहीं कर सकते। हाईकोर्ट ने कमिश्नर के पुराने आदेश को खारिज करते हुए निर्देश दिया है कि याचिकाकर्त्ता द्वारा उठाए गए इस विवाद को तुरंत सुनवाई और निपटारे के लिए संबंधित लेबर कोर्ट या इंडस्ट्रियल ट्रिब्यूनल को भेजा (रेफर किया) जाए।


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Kuldeep

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