Shimla: केंद्र सरकार विद्युत संशोधन विधेयक 2025 के खिलाफ भड़के कर्मचारी व इंजीनियर्ज
punjabkesari.in Thursday, Feb 12, 2026 - 10:31 PM (IST)
शिमला (राजेश): केंद्र सरकार के विद्युत संशोधन विधेयक 2025 के खिलाफ बिजली बोर्ड कर्मचारियों, पैंशनरों व इंजीनियरों ने केंद्र सरकार के खिलाफ हल्ला बोल दिया है। वीरवार को देशभर सहित प्रदेश भर में बिजली बोर्ड कर्मचारियों ने विद्युत संशोधन विधेयक 2025 का विरोध किया। इसके अतिरिक्त कर्मचारियों ने केंद्र सरकार की बिजली क्षेत्र में निजीकरण की नीतियों के खिलाफ पूर्ण रूप से पैन डाऊन एवं टूल डाऊन हड़ताल रही। इसका प्रभाव कार्यालयों के साथ-साथ फील्ड कार्यों में भी स्पष्ट रूप से देखने को मिला। हालांकि आपातकालीन सेवाओं को हड़ताल से बाहर रखा गया, जिससे आम जनता को आवश्यक सेवाओं में कोई बाधा नहीं हुई। भोजनावकाश के दौरान प्रदेशभर में बिजली बोर्ड कार्यालयों के बाहर 63 जगहों पर निजीकरण के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किए गए। कुछ जगहों पर प्रशासन के माध्यम से केंद्र सरकार को ज्ञापन भी सौंपे गए। जिनमें बिजली बोर्ड के पैंशनरों के साथ-साथ विद्युत उपभोक्ताओं ने भी भाग लिया। शिमला में बोर्ड मुख्यालय के बाहर सैंकड़ों कर्मचारियों, अभियंताओं व पैंशनर्ज ने प्रदर्शन किया।
वित्त सचिव के बिजली बोर्ड के निजीकरण के बयान की निंदा की
प्रदर्शन के दौरान बोर्ड कर्मचारियों ने प्रदेश के वित्त सचिव के राज्य बिजली बोर्ड के निजीकरण के बयान की भी कड़ी निंदा की और कहा निजीकरण के किसी भी प्रयास का विरोध किया जाएगा। संयुक्त कार्रवाई समिति पदाधिकारियों ने कहा कि केंद्र सरकार लगातार राज्य सरकारों पर बिजली कंपनियों के निजीकरण के लिए दबाव बना रही है। इसी दिशा में बिजली कानून में कई संशोधन प्रस्तावित किए जा चुके हैं। हाल ही में ऊर्जा मंत्रालय द्वारा विद्युत संशोधन विधेयक 2025 का मसौदा लाया गया है, जिसे इस बजट सत्र में संसद में पेश किए जाने की संभावना है। पदाधिकारियों ने कहा कि विधेयक के तहत जिन राज्यों में बिजली वितरण का कार्य निजी हाथों में सौंपा गया है, वहां यह प्रयोग अपेक्षित परिणाम नहीं दे सका है। इससे उपभोक्ताओं के साथ-साथ राज्य सरकारों को भी वित्तीय एवं प्रशासनिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है। इसके बावजूद केंद्र सरकार शेष सरकारी बिजली कंपनियों को भी प्रतिस्पर्धा के नाम पर निजी हाथों में देने के प्रयास कर रही है।
विधेयक के तहत यह होगा बिजली बोर्ड को नुक्सान
बोर्ड कर्मचारी नेताओं ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि प्रस्तावित विधेयक में एक ही क्षेत्र में अनेक वितरण कंपनियों को कार्य करने की अनुमति देने तथा सरकारी बिजली बोर्ड के नैटवर्क का उपयोग निजी कंपनियों को उपलब्ध करवाने का प्रावधान किया है। साथ ही मध्यम एवं निम्न वर्ग के उपभोक्ताओं को दी जा रही क्रॉस सबसिडी समाप्त करने का प्रस्ताव है। दूसरी ओर दूरदराज एवं जनजातीय क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की जिम्मेदारी सरकारी कंपनी पर ही रखी गई है। इसे राज्य सरकारों की संघीय शक्तियों को कमजोर करने का प्रयास भी बताया गया।
स्मार्ट मीटरिंग योजना का भी किया विरोध
केंद्र सरकार की स्मार्ट मीटरिंग योजना का भी विरोध किया और कहा कि इसका भारी वित्तीय बोझ प्रदेश की जनता पर डाला जा रहा है, जबकि इसका लाभ भविष्य में निजी कंपनियों को मिलेगा। जेएसी ने स्पष्ट किया कि बिजली बोर्ड का निजीकरण करने के बजाय उसे मजबूत करने की आवश्यकता है। कर्मचारियों की कमी को दूर करने के लिए नई भर्ती की जाए व कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाने के लिए पुरानी पैंशन योजना लागू की जाए
ज्वाइंट एक्शन के नेतृत्व में ईं. लोकेश ठाकुर, हीरा लाल वर्मा, मुकेश राठी, प्रशांत शर्मा, मनोहर लाल, एसके सोनी और केएस गुप्ता ने बिजली कंपनी के निजीकरण का विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल कर्मचारियों की नहीं, बल्कि अभियंताओं, कर्मचारियों, आऊटसोर्स कर्मियों, पैंशनरों और उपभोक्ताओं सभी की है। यदि केंद्र सरकार निजीकरण की दिशा में आगे बढ़ती है तो प्रदेश की जनता के साथ मिलकर इस सार्वजनिक ढांचे को बचाने के लिए व्यापक आंदोलन किया जाएगा।

