शिमला के स्कैंडल प्वाइंट पर बवाल: फीस वृद्धि और प्रो-वीसी पद के खिलाफ SFI ने दिया धरना, पुलिस ने सड़क से घसीटकर खदेड़े छात्र

punjabkesari.in Thursday, Jun 11, 2026 - 06:48 PM (IST)

शिमला (संतोष): हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (HPU) में 25 प्रतिशत फीस बढ़ौतरी और प्रति-कुलपति (प्रो-वीसी) के पद को समाप्त करने की मांग को लेकर स्टूडैंट्स फैडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने मोर्चा खोल दिया है। वीरवार को इस मुद्दे पर शिमला में भारी ड्रामा देखने को मिला। एक तरफ जहां एसएफआई के राज्य नेतृत्व ने शिक्षा सचिव से मुलाकात कर अपना विरोध दर्ज करवाया, वहीं दूसरी तरफ कार्यकर्त्ताओं ने मालरोड के सबसे वीआईपी जोन स्कैंडल प्वाइंट पर अचानक उग्र प्रदर्शन कर पुलिस-प्रशासन के पसीने छुड़ा दिए।

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स्कैंडल प्वाइंट पर पुलिस ने किया बल प्रयोग
शिमला में इन दिनों अंतर्राष्ट्रीय ग्रीष्म महोत्सव चल रहा है, जिसके चलते शहर में धरना-प्रदर्शन पर कड़े प्रतिबंध लागू हैं। चप्पे-चप्पे पर पुलिस का पहरा है। इसके बावजूद एसएफआई कार्यकर्त्ता सुरक्षा व्यवस्था और खुफिया तंत्र को चकमा देकर स्कैंडल प्वाइंट के बीचोंबीच सड़क पर धरने पर बैठ गए और उग्र नारेबाजी शुरू कर दी। इस अचानक हुए बवाल से प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। स्थिति को बिगड़ता देख मौके पर तैनात पुलिस टीम ने तुरंत मोर्चा संभाला। पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा और प्रतिबंधात्मक आदेशों का उल्लंघन कर रहे प्रदर्शनकारी छात्रों को जबरन वहां से खदेड़ा गया। इस दौरान कई एसएफआई कार्यकर्त्ताओं ने अपनी गिरफ्तारी भी दी।

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शिक्षा सचिव को छात्रों की मांगों से जुड़ा ज्ञापन सौंपा 
सड़कों पर मचे इस बवाल के बीच एसएफआई के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा सचिव राकेश कंवर से मुलाकात की और छात्रों की मांगों से जुड़ा एक ज्ञापन उन्हें सौंपा। इस प्रतिनिधिमंडल में एसएफआई के राज्याध्यक्ष अनिल ठाकुर, राज्य सचिव सन्नी सेकटा, राज्य उपाध्यक्ष रितेश और राज्य सचिवालय से दीपक, विवेक नेहरा, कृतिका नेगी व मुकेश प्रमुख रूप से शामिल रहे।

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गरीबों पर बोझ डाल रही फीस बढ़ौतरी : एसएफआई 
एसएफआई ने आरोप लगाया कि एचपीयू की कार्यकारी परिषद ने 28 मार्च को कालेजों और विश्वविद्यालय में 25 प्रतिशत फीस बढ़ाने का जो फैसला लिया है, वह सीधे तौर पर गरीब और मध्यम वर्ग के छात्रों की जेब पर डाका है। संगठन का दावा है कि इस भारी फीस बढ़ौतरी के कारण ही मौजूदा शैक्षणिक सत्र में कई कोर्सों में दाखिले का ग्राफ काफी गिर गया है। एसएफआई ने प्रति-कुलपति (Pro-VC) के पद पर भी कड़ा एतराज जताया है। नेताओं का तर्क है कि वर्तमान प्रो-वाइस चांसलर का कार्यकाल पूरा हो चुका है और नए कुलपति की नियुक्ति भी हो चुकी है। ऐसे में सीमित शक्तियों वाले इस पद पर नई नियुक्ति की कोई आवश्यकता नहीं है। एसएफआई के राज्याध्यक्ष अनिल ठाकुर और सचिव सन्नी सेकटा ने कहा कि विश्वविद्यालय 1970 में अपनी स्थापना के बाद लंबे समय तक बिना प्रो-वीसी के सुचारू रूप से चलता रहा है। उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि एक तरफ एचपीयू वित्तीय संकट का रोना रोकर छात्रों की फीस बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी तरफ प्रो-वीसी के पद पर वेतन, सरकारी गाड़ी, ड्राइवर, सुरक्षाकर्मी और निजी स्टाफ के नाम पर लाखों रुपए फूंक रहा है। इसके अलावा सरदार पटेल यूनिवर्सिटी (SPU) मंडी बनने के बाद एचपीयू का कार्यक्षेत्र भी आधा रह गया है।

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आंदोलन तेज करने की दी चेतावनी
एसएफआई ने स्पष्ट मांग की है कि इस वीआईपी पद (Pro-VC) पर होने वाली फिजूलखर्ची को तुरंत बंद किया जाए और यह पैसा छात्रों की स्कॉलरशिप, रिसर्च सुविधाओं और शैक्षणिक ढांचे को मजबूत करने में लगाया जाए। छात्र संगठन ने सरकार और एचपीयू प्रशासन को चेताया है कि यदि फीस बढ़ौतरी का फैसला वापस नहीं लिया गया और प्रशासनिक फिजूलखर्ची बंद नहीं हुई तो इस आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।

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Content Writer

Vijay

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