सरकारी जंगल में करोड़ों का 'खैर घोटाला', विभाग को भनक तक नहीं
punjabkesari.in Thursday, Mar 19, 2026 - 11:46 AM (IST)
हिमाचल डेस्क। हिमाचल के ऊना जिले से पर्यावरण को छलनी करने वाली एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है। जहां प्रदेश सरकार जंगलों को बचाने के दावे करती है, वहीं झंबर पंचायत में वन माफिया ने विभाग की नाक के नीचे पूरे के पूरे जंगल का वजूद ही मिटा दिया। किसी फिल्म की पटकथा की तरह, माफिया ने अंधेरे का फायदा उठाया और बेशकीमती खैर के पेड़ों पर ऐसी आरी चलाई कि अब वहां सिर्फ ठूंठ बचे हैं।
क्या है पूरा मामला?
झंबर पंचायत के साथ लगते सरकारी जंगल में पिछले दो-तीन दिनों के भीतर एक बड़े 'ऑपरेशन' को अंजाम दिया गया। ग्रामीणों के मुताबिक, माफिया ने लगभग 1,000 खैर के पेड़ों को काटकर पूरे क्षेत्र को मैदान में तब्दील कर दिया है। इन पेड़ों की बाजारी कीमत करोड़ों रुपये बताई जा रही है।
हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी तादाद में पेड़ों का कत्लेआम हुआ, लकड़ियां ढोई गईं, लेकिन वन विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि उन्होंने पहले ही जंगल में संदिग्ध गतिविधियों की सूचना दी थी। चेतावनी के बावजूद विभाग ने कोई सुरक्षात्मक कदम नहीं उठाए। बुधवार को जब ग्रामीण जंगल की ओर गए, तब इस तबाही का खुलासा हुआ।
ग्रामीणों का आक्रोश
ग्रामीणों ने सीधे तौर पर वन विभाग की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा किया है। जंगल की सुरक्षा के लिए तैनात अमले की "लापरवाही" ने अब विभाग की ईमानदारी पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं।
पुलिस और वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच तो शुरू की है, लेकिन ग्रामीण अब "निष्पक्ष जांच" और "दोषियों की गिरफ्तारी" से कम पर मानने को तैयार नहीं हैं।
प्रशासन का पक्ष
इस गंभीर मामले पर ऊना के वन मंडल अधिकारी (DFO) सुशील राणा ने कहा कि "झंबर में हुए इस बड़े पैमाने पर कटान की खबर वाकई चौंकाने वाली है। विभाग की विशेष टीम मौके पर साक्ष्य जुटाएगी। इस अपराध में जो भी शामिल पाया जाएगा, उसे किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।"

