Kullu: रेव पार्टियों के झमेले से अभी कुल्लू के पूर्व डीसी और एसपी को नहीं मिली राहत
punjabkesari.in Sunday, Aug 09, 2026 - 08:57 PM (IST)
कुल्लू (शम्भू प्रकाश): जिला कुल्लू की पार्वती वैली, जीभी व अन्य क्षेत्रों में रेव पार्टियों के आयोजन के प्रकरण में कुल्लू से ट्रांसफर किए गए डीसी अनुराग चंद्र और एसपी मदन लाल कौशल को इस झमेले से अभी राहत नहीं मिली है। 10 अगस्त सोमवार को यह मामला सुप्रीम कोर्ट और 20 अगस्त को हाईकोर्ट में सूचीबद्ध है। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने कुल्लू जिले के कसोल और अन्य हिस्सों में कथित रेव पार्टी और ड्रग नेक्सस की जांच की निगरानी जारी रखी है। इसके साथ ही कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और विशेष जांच दल के गठन पर रोक लगाने वाले अंतरिम आदेशों का भी संज्ञान लिया है।
एक अनुपालन सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ को सूचित किया कि डीसी, एसपी कुल्लू और उप-मंडल मैजिस्ट्रेट ने विशेष अनुमति याचिकाएं दायर कर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। शीर्ष अदालत ने 27 जुलाई और 4 अगस्त 2026 के अपने आदेशों द्वारा अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और एसआईटी के गठन से जुड़े उच्च न्यायालय के निर्देशों पर रोक लगा दी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि उच्च न्यायालय द्वारा जारी तबादले (ट्रांसफर) के आदेशों का पालन किया जाए। उच्च न्यायालय ने याद दिलाया कि उसने 24 जून 2026 के अपने आदेश में एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था, ताकि यह जांच की जा सके कि क्या उन व्यावसायिक आयोजनों को अनुमति देने में अधिकारियों की मूक सहमति या मिलीभगत थी, जहां कथित तौर पर बड़े पैमाने पर नशीली दवाओं का सेवन किया जा रहा था।
पीठ ने 'हिमालयन एनवायरनमैंट प्रोटैक्शन सोसायटी कुल्लू' द्वारा दायर सीडब्ल्यूपीईआईएल संख्या 53 (2025)' में उठाई गई चिंताओं को भी सामने रखा। याचिका में आरोप लगाया गया था कि पर्यटन के नाम पर कुल्लू के कसोल, जिभी, मनाली और अन्य हिस्सों में रेव पार्टियां आयोजित की जा रही थीं, जिनमें प्रवेश शुल्क कथित तौर पर 5000 रुपए से लेकर 7 लाख रुपए तक था। याचिका में आगे आरोप लगाया गया कि ऐसे आयोजनों में नशीले पदार्थ खुलेआम उपलब्ध थे और दावा किया गया कि ऐसी गतिविधियां प्रभावशाली व्यक्तियों के संरक्षण और राजनीतिक शह के बिना नहीं चल सकतीं।
अपने पिछले आदेश में उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से कुल्लू और मंडी जिलों में रेव पार्टियों से संबंधित दर्ज एफआईआर की संख्या, गिरफ्तार किए गए लोगों की उम्र का विवरण, आयोजकों की पहचान की गई या नहीं, उनकी वित्तीय कमाई की जांच की गई या नहीं, और क्या ऐसी गतिविधियों में शामिल आयोजकों की संपत्तियों को कुर्क या जब्त करने के लिए कदम उठाए गए हैं, इस पर विस्तृत जवाब मांगा था। सुनवाई के दौरान कोर्ट को सूचित किया गया कि एसपी और डीसी कुल्लू के तबादले के आदेशों को 5 अगस्त को लागू कर दिया गया है। यह भी बताया गया कि उपमंडल मैजिस्ट्रेट की सुप्रीम कोर्ट में चुनौती 4 अगस्त को खारिज हो गई थी और उनके तबादले का आदेश जल्द ही जारी हो सकता है। उच्च न्यायालय ने इस मामले को आगे के अनुपालन के लिए 20 अगस्त को सूचीबद्ध किया है। उच्चतम न्यायालय में 20 अगस्त की तारीख सुनवाई के लिए तय हुई है।
दबाव के चलते 12 जून के बाद रुकी रेव पार्टियां
उच्च न्यायालय के आदेश और अन्य तरफ से आए दबाव के चलते 12 जून के बाद रेव पार्टियां रुक गईं। उससे पहले धड़ल्ले से ऐसी पार्टियां हुईं और नशा माफिया ने चांदी कूटी। जनता के बढ़ते दबाव और हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद इन पार्टियों पर 12 जून के बाद रोक लगी और पुलिस व प्रशासन अलर्ट हुए। हाईकोर्ट की सख्ती और तबादला आदेशों के बाद लपेटे में आए अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और कुछ राहत मिली, लेकिन तबादला आदेश यथावत रहे। अब आगामी सुनवाई को लेकर लोगों की निगाहें सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट पर टिकी हैं।
वन विभाग क्यों बैठा है चुप
लोगों का कहना है कि रेव पार्टियां ज्यादातर वन भूमि पर और जंगलों में होती हैं। वन विभाग का भी अपनी भूमि व जंगलों में नशे से जुड़े ऐसे आयोजनों को रोकने का उत्तरदायित्व बनता है। इस प्रकरण में वन विभाग से भी हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट को जवाब तलबी करनी चाहिए। हिमालयन एनवायरनमैंट प्रोटैक्शन सोसायटी कुल्लू के अध्यक्ष अभिषेक राय ने बताया कि 10 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट और 20 अगस्त को हाईकोर्ट ने मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।

