"UGC मानदंडों का उल्लंघन करता है हिमाचल विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक", शिक्षक संगठन ने कहा
punjabkesari.in Saturday, Sep 12, 2026 - 11:19 AM (IST)
Shimla News : हिमाचल प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के भारी विरोध के बीच 'हिमाचल प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक' पारित होने के एक हफ्ते से अधिक समय बाद एक शिक्षक संगठन ने शुक्रवार को कहा कि ये संशोधन विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के मानदंडों का उल्लंघन हैं, जिससे विश्वविद्यालयों को मिलने वाले अनुदान पर असर पड़ सकता है।
उक्त संसोधन विधेयक को अभी राज्यपाल की मंजूरी मिलना बाकी है। इसमें हिमाचल प्रदेश के सभी छह सरकारी विश्वविद्यालयों में भर्तियां राज्य लोक सेवा आयोग और राज्य चयन आयोग के जरिये करने का प्रस्ताव है। राज्य लोक सेवा आयोग शिक्षण कर्मचारियों की भर्ती करेगा, जबकि राज्य चयन आयोग गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्ति करेगा। विधेयक में राज्य सरकार के वित्त सचिव को सभी छह विश्वविद्यालयों की वित्त समितियों की अध्यक्षता करने की भी अनुमति देने का प्रावधान है। वित्तीय मामलों में इन समितियों की सिफारिशों को कार्यकारी परिषद को मानना ही होगा।
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिक्षक कल्याण संघ (एचपीयूटीडब्ल्यूए) के अध्यक्ष प्रोफेसर नितिन व्यास ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में बदलाव और वित्तीय शक्तियां वित्त सचिव को सौंपना यूजीसी के मानदंडों का स्पष्ट उल्लंघन है और इसका असर आयोग से मिलने वाले अनुदान पर पड़ सकता है। व्यास ने कहा कि यूजीसी के मानदंडों के अनुसार, भर्ती प्रक्रिया में पहले एक स्क्रीनिंग समिति और उसके बाद कुलपति की अध्यक्षता वाली चयन समिति होती है, जिसमें विषय विशेषज्ञ भी शामिल होते हैं। उन्होंने कहा, "यूजीसी विश्वविद्यालयों को बुनियादी ढांचे, शोध और अन्य मदों के लिए अनुदान देता है। अगर हम मानदंडों का पालन नहीं करते हैं, तो अनुदान रुक सकता है। संस्थान की स्वायत्तता और सरकार का हस्तक्षेप न होना जरूरी शर्तें हैं।"

