Himachal: बच्चे की अधिक उम्र होने पर नर्सरी से यूकेजी में दाखिले से इंकार नहीं कर सकेंगे स्कूल
punjabkesari.in Saturday, Oct 17, 2026 - 12:37 PM (IST)
शिमला (प्रीति): प्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत नर्सरी से पहली कक्षा तक दाखिले के लिए आयु सीमा को लेकर शिक्षा विभाग ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। जारी निर्देशों के तहत शैक्षणिक सत्र में प्रवेश के लिए निर्धारित कट ऑफ तिथि यानी 30 सितम्बर तक बच्चे की आयु संबंधित कक्षा के लिए तय न्यूनतम आयु के बराबर या उससे अधिक होनी चाहिए। इससे स्पष्ट है कि बच्चे की अधिक उम्र होने पर भी स्कूल प्रशासन नर्सरी से यूकेजी में दाखिला देने से इंकार नहीं कर सकेंगे। ये नियम प्रदेश के सभी सरकारी और निजी स्कूलों पर समान रूप से लागू होंगे।
पहली कक्षा में प्रवेश के लिए 6 वर्ष होनी चाहिए बच्चे की आयु
शिक्षा विभाग की ओर से जारी स्पष्टीकरण के अनुसार बालवाटिका-1 (नर्सरी) में दाखिले के लिए बच्चे की आयु 3 वर्ष, बालवाटिका-2 (एलकेजी) के लिए 4 वर्ष, बालवाटिका-3 (यूकेजी) के लिए 5 वर्ष और पहली कक्षा में प्रवेश के लिए 6 वर्ष होनी चाहिए। बच्चे की निर्धारित आयु शैक्षणिक सत्र के 30 सितम्बर तक पूरी होनी अनिवार्य है। शिक्षा विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि निर्धारित आयु सीमा प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु है, न कि अधिकतम आयु है। यानी कि यदि कोई बच्चा संबंधित कक्षा के लिए तय न्यूनतम आयु से अधिक उम्र का हो चुका है, तो केवल इसी आधार पर उसे दाखिले से वंचित नहीं किया जा सकता।
निजी स्कूलों को भी करना होगा पालन
सरकार ने साफ किया है कि आयु संबंधी ये नियम हिमाचल प्रदेश के सभी स्कूलों पर समान रूप से लागू होंगे। निजी स्कूल भी निर्धारित आयु मानदंड और कटऑफ तिथि का पालन करने के लिए बाध्य होंगे। शिक्षा विभाग ने संबंधित अधिकारियों और स्कूलों को निर्देशों का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा है।
नियम तोड़ने पर होगी कार्रवाई
विभाग ने चेतावनी दी है कि निर्देशों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई), हिमाचल प्रदेश शिक्षा का अधिकार नियम, 2025 और अन्य संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
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