Himachal: पहले माताएं चखेंगी मिड-डे मील... फिर सजेगी बच्चों की थाली
punjabkesari.in Monday, Feb 16, 2026 - 12:05 PM (IST)
हिमाचल डेस्क। अब सरकारी स्कूलों में दोपहर का भोजन किसी शाही दावत से कम नहीं होगा। जिस तरह प्राचीन काल में राजा-महाराजाओं को भोजन परोसने से पहले 'चखनू' (भोजन चखने वाले) उसकी शुद्धता और स्वाद की जांच करते थे, ठीक उसी तर्ज पर अब स्कूलों में बच्चे भी पूरी तरह आश्वस्त होकर भोजन कर सकेंगे। शिक्षा विभाग ने एक अनूठी पहल करते हुए मिड-डे मील की कमान माताओं के हाथों में सौंपने का निर्णय लिया है।
केंद्र सरकार की 'भोजन पारखी योजना' के तहत अब स्कूलों में बच्चों को परोसा जाने वाला खाना सीधे थालियों में नहीं जाएगा। इसकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। हर स्कूल में स्थानीय महिलाओं और माताओं की एक समिति गठित की जाएगी। भोजन वितरण से ठीक 30 मिनट पहले समिति की एक या दो महिलाएं स्कूल पहुंचकर खाने का स्वाद और पौष्टिकता परखेंगी।
यदि भोजन का स्वाद बेहतर और गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पाया जाता है, तभी उसे बच्चों में बांटने की अनुमति दी जाएगी। पहले यह जिम्मेदारी शिक्षकों पर थी, लेकिन अब माताओं की मौजूदगी को अनिवार्य बना दिया गया है।
सख्त निगरानी और रिकॉर्ड कीपिंग
इस व्यवस्था को केवल कागजों तक सीमित न रखकर धरातल पर उतारने के लिए प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। एमडीएम प्रभारी को एक अलग रजिस्टर बनाना होगा, जिसमें ड्यूटी पर मौजूद महिला को चखे गए भोजन पर अपनी टिप्पणी और हस्ताक्षर करने होंगे। इस योजना से प्रदेश के प्री-नर्सरी से लेकर आठवीं कक्षा तक के लगभग 5.64 लाख विद्यार्थियों को सुरक्षित और स्वादिष्ट भोजन मिल सकेगा।
लापरवाही पर कार्रवाई
एमडीएम के जिला नोडल अधिकारी, राज कुमार पराशर के अनुसार, जो स्कूल इस 'चखनू' प्रक्रिया का पालन नहीं करेंगे या रिकॉर्ड में हेरफेर करेंगे, उनके प्रबंधन के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
पहले अक्सर खाने की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें आती थीं, क्योंकि खाना बनने के तुरंत बाद बिना किसी ठोस जांच के बांट दिया जाता था। अब माताओं की भागीदारी से न केवल खाने का स्वाद सुधरेगा, बल्कि स्कूलों में स्वच्छता और पोषण के प्रति जवाबदेही भी बढ़ेगी।

