Hamirpur: सरकार से सवाल करना गुनाह और जन सेवा बनी गुनाह, यही आपातकाल है : राजेंद्र राणा
punjabkesari.in Sunday, Aug 16, 2026 - 05:07 PM (IST)
हमीरपुर (ब्यूरो): जरूरतमंदों के लिए निःशुल्क चिकित्सा शिविर लगाना भी अब अपराध की श्रेणी में आ गया है? यह सवाल प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता एवं पूर्व विधायक राजेंद्र राणा ने उठाया है। सर्व कल्याणकारी संस्था द्वारा 6 सितम्बर को सुजानपुर अस्पताल में प्रस्तावित निःशुल्क मैडीकल कैंप को अस्पताल परिसर में जगह न मिलने के बाद उन्होंने प्रदेश सरकार पर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सुक्खू राज में जनहित के सवाल पूछना गैर कानूनी हो गया है और जनसेवा भी सरकार की अनुमति की मोहताज हो गई है। हिमाचल में आपातकाल की यही निशानी काफी है। इतने छोटे दिल और तंग सोच वाला मुख्यमंत्री पहले न देखा, न सुना।
उन्होंने कहा कि संस्था का प्रयास समाज में भाईचारे और नि:स्वार्थ मदद की परंपरा को आगे बढ़ाना है, लेकिन सरकार जनहितैषी शिविरों पर हुकूमत बिठाकर लोगों को बांटने का काम कर रही है। उन्होंने बताया कि कैंप के लिए संस्था ने 20 जुलाई को आवेदन दे दिया था, लेकिन स्थानीय विधायक के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल में विकास कार्य का हवाला देकर अनुमति देने से इंकार कर दिया, जबकि कैंप के लिए दवाइयां और उपकरणों सहित चिकित्सकों की तैयारी पूरी थी। उन्होंने दावा किया कि जिस भवन में कैंप लगना था, वहां कोई काम नहीं चल रहा है।
उन्होंने बताया कि संस्था प्रदेश में अब तक 50 निःशुल्क मैडीकल कैंप लगा चुकी है। अकेले सुजानपुर अस्पताल में ही 15 से अधिक शिविर अलग-अलग सरकारों में लग चुके हैं। ऐसे में इस बार ही अड़चन क्यों आई, यह अब जनता के बीच चर्चा का विषय है। उन्होंने कहा कि शिविर में पीजीआई चंडीगढ़ सहित देश के बड़े संस्थानों के विशेषज्ञ डॉक्टर आते हैं। जांच, टैस्ट और दवाइयां सब निःशुल्क दी जाती हैं, जबकि हिमाचल के सरकारी अस्पताल रैफरल यूनिट बन गए हैं। हर परिवार के लिए पीजीआई जाना आसान नहीं। ऐसे में ये कैंप बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए बड़ी राहत हैं। राजेंद्र राणा ने स्पष्ट किया कि संस्था में हर जाति-धर्म और विचारधारा के लोग हैं। बीमारी किसी पार्टी की नहीं होती, इसलिए इलाज भी पार्टी देखकर नहीं होता। ये कैंप जनता की मांग पर लगते हैं।
सरकार और विधायक से किया सवाल
राणा ने पूछा कि नियमों के तहत निःशुल्क शिविर आयोजित हो रहा है, तो उसे रोकने से किसका भला हुआ? अगर कोई मरीज इलाज से वंचित हुआ तो जिम्मेदारी किसकी? स्थानीय विधायक कैप्टन रणजीत सिंह राणा पर निशाना साधते हुए उन्होंने पूछा कि किसके निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग को अनुमति देने से रोका गया? किसके कहने पर जनता से धोखा किया गया?
पहले अपने 9 नेता, अब मंत्री-विधायक किए जा रहे जलील
राजेंद्र राणा ने सरकार पर तंज कसा कि 2 साल पहले तक सरकार ने अपने ही 9 नेताओं को जलील किया और अब अन्य मंत्रियों-विधायकों को परेशान कर रही है। उन्होंने द्रंग के दियोरी स्कूल के उद्घाटन को रद्द कर मुख्यमंत्री द्वारा स्वयं फीता काटने और मंत्री विक्रमादित्य सिंह को स्वतंत्रता दिवस पर मुख्यातिथि न बनाने का जिक्र किया। "एक उद्घाटन के लिए अपने ही मंत्रियों को दरकिनार करना कहां तक तर्कसंगत है? उन्होंने कहा कि इसी सरकार ने हमीरपुर के सराहकड़ में संस्था द्वारा आशा वर्करों को स्वास्थ्य परीक्षण किट देकर सम्मानित करने पर भी द्वेष दिखाया और आशा वर्करों को समारोह से दूर रहने की धमकी दी।

