सिरमौर की ''हॉटी सौंठ'' पर लगी भारत सरकार की मुहर, राष्ट्रीय स्तर पर मिली कानूनी पहचान
punjabkesari.in Friday, Feb 27, 2026 - 11:32 PM (IST)
नाहन (आशु): जिला सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र के अदरक उत्पादक किसानों के लिए गौरव का क्षण है। जिला सिरमौर की प्रसिद्ध ‘हॉटी सौंठ’ को भारत सरकार के पौधा किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण (नई दिल्ली) द्वारा किसान किस्म (फार्मर वैरायटी) के रूप में आधिकारिक पंजीकरण प्रदान किया गया है। इससे क्षेत्र की पारंपरिक सौंठ को राष्ट्रीय स्तर पर कानूनी पहचान मिल गई है। दरअसल पंजीकरण के तहत जारी प्रमाण पत्र 4 अगस्त, 2025 से प्रभावी माना गया है। यह मान्यता अदरक की उस पारंपरिक किस्म को मिली है, जिसे गिरिपार के किसान वर्षों से ‘हॉटी सौंठ’ नाम से तैयार करते आ रहे हैं।
हॉटी किसान संघ को सौंपा प्रमाण पत्र
यह अधिकृत पंजीकरण प्रमाण पत्र हॉटी किसान संघ, गांव शारली (तहसील कमरऊ, जिला सिरमौर) के नाम जारी किया गया है। कृषि विज्ञान केंद्र में आयोजित कार्यक्रम के दौरान हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के कुलपति डॉ. अशोक कुमार पांडा के हाथों यह प्रमाण पत्र हॉटी किसान संघ के अध्यक्ष कुंदन सिंह शास्त्री और सदस्य रामभज चौहान ने प्राप्त किया। इस अवसर पर किसानों ने कहा कि यह उपलब्धि गिरिपार के अदरक उत्पादकों की कई दशकों पुरानी मांग की पूर्ति है।
अब मिलेगा उत्पादन और विपणन का अधिकार
कृषि विज्ञान केंद्र सिरमौर के प्रभारी एवं प्रधान वैज्ञानिक डॉ. पंकज मित्तल ने बताया कि पंजीकरण के साथ ‘हॉटी सौंठ’ को कानूनी संरक्षण प्राप्त हो गया है। इसके तहत संबंधित किसान संघ को इस किस्म के उत्पादन, विपणन और संरक्षण का वैधानिक अधिकार मिलेगा। इससे न केवल उत्पाद की विशिष्ट पहचान सुरक्षित रहेगी, बल्कि बाजार में उसकी ब्रांड वैल्यू भी बढ़ेगी। इससे गिरिपार क्षेत्र के किसानों को बेहतर दाम मिलने की संभावना बढ़ेगी और उनकी आय में सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
वैज्ञानिक सहयोग से मिली सफलता
कार्यक्रम में इस उपलब्धि के लिए कृषि विज्ञान केंद्र सिरमौर और हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के वैज्ञानिकों के प्रयासों की सराहना की गई। किसानों ने कहा कि दस्तावेजीकरण और पंजीकरण की जटिल प्रक्रिया में संस्थानों के मार्गदर्शन से ही यह संभव हो पाया है। ‘हॉटी सौंठ’ को मिली यह राष्ट्रीय मान्यता अब सिरमौर की पारंपरिक कृषि विरासत को नई पहचान देने के साथ-साथ स्थानीय किसानों के लिए आर्थिक सशक्तिकरण का मार्ग भी प्रशस्त करेगी।

