हिमाचल में सड़क सुरक्षा ऑडिट नीति को लागू करने की मंजूरी, PWD मुख्यालय में बनेगा नया सेफ्टी सैल
punjabkesari.in Thursday, Jul 23, 2026 - 07:24 PM (IST)
शिमला (ब्यूरो): राज्य सरकार ने लोक निर्माण विभाग के अधीन आने वाली सड़कों के लिए सड़क सुरक्षा ऑडिट नीति लागू करने को मंजूरी प्रदान की है, ताकि सड़क सुरक्षा को राज्य में सड़कों की योजना, डिजाइन, निर्माण, संचालन और रखरखाव का अभिन्न हिस्सा बनाया जा सके। इसी कड़ी में सरकार ने सड़क सुरक्षा संबंधी कमियों की व्यवस्थित पहचान और उनके प्रभावी समाधान की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए भारतीय सड़क कांग्रेस के दिशा-निर्देशों एवं सिफारिशों के अनुरूप एक व्यापक सड़क सुरक्षा ऑडिट ढांचा अपनाया है।
5 महत्वपूर्ण चरणों में होगा सड़क सुरक्षा ऑडिट
इस नीति का उद्देश्य सड़क अवसंरचना में सुधार करना, दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करना तथा सभी सड़क उपयोगकर्त्ताओं के लिए अधिक सुरक्षित सड़क नैटवर्क विकसित करना है। इस नीति के अंतर्गत किसी भी सड़क परियोजना के 5 महत्वपूर्ण चरणों में सड़क सुरक्षा ऑडिट किया जाएगा। इनमें व्यवहार्यता अथवा प्रारंभिक डिजाइन चरण, विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) चरण, निर्माण चरण, सड़क को यातायात के लिए खोलने से पूर्व का चरण तथा पहले से निर्मित सड़कों का ऑडिट शामिल है। व्यवहार्यता चरण में ऑडिटर मार्ग चयन, सड़क की संरेखण (अलाइनमैंट), चौराहों, क्रॉस-सैक्शन तथा मौजूदा सड़क नैटवर्क से संपर्क का परीक्षण करेंगे। विस्तृत डिजाइन चरण में ज्यामितीय डिजाइन, सड़क संकेतक, सड़क चिन्हांकन, प्रकाश व्यवस्था, संवेदनशील सड़क उपयोगकर्त्ताओं (जैसे पैदल यात्री एवं साइकिल चालक) के लिए सुविधाएं तथा सड़क किनारे सुरक्षा प्रावधानों की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। निर्माण चरण के दौरान ऑडिट में कार्यस्थल सुरक्षा, यातायात प्रबंधन योजना, श्रमिकों की सुरक्षा तथा पूर्व में दिए गए ऑडिट सुझावों के अनुपालन की समीक्षा की जाएगी। सड़क को यातायात के लिए खोलने से पूर्व दिन एवं रात्रि दोनों समय विस्तृत निरीक्षण किया जाएगा। इसके अतिरिक्त पहले से निर्मित सड़कों का भी समय-समय पर ऑडिट किया जाएगा, ताकि उभरते हुए जोखिमों और सुरक्षा संबंधी कमियों की पहचान कर उनका समय पर समाधान किया जा सके।
कौन करेगा सड़क सुरक्षा ऑडिट?
नीति के अनुसार सड़क सुरक्षा ऑडिट केवल भारतीय सड़क कांग्रेस द्वारा प्रमाणित रोड सेफ्टी ऑडिटर अथवा ऐसे विभागीय अधिकारी एवं कर्मचारी करेंगे, जिन्होंने 15 दिवसीय सड़क सुरक्षा ऑडिट प्रमाणन प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया हो तथा पर्वतीय सड़कों के निर्माण का कम से कम 10 वर्ष का अनुभव रखते हों। साथ ही यह भी अनिवार्य किया गया है कि ऑडिटर स्वतंत्र हों और जिस परियोजना का ऑडिट कर रहे हों, उसके निर्माण, क्रियान्वयन या संचालन से उनका कोई प्रत्यक्ष संबंध न हो।
रोड सेफ्टी सैल स्थापित किया जाएगा
सरकार के अनुसार संस्थागत व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए लोक निर्माण विभाग मुख्यालय में एक समर्पित रोड सेफ्टी सैल स्थापित किया जाएगा। यह सैल सड़क सुरक्षा ऑडिट कार्यक्रम के क्रियान्वयन की निगरानी करेगा, प्रगति का आकलन करेगा, योग्य ऑडिटरों का पैनल तैयार करेगा, अनुपालन रिपोर्टों की समीक्षा करेगा। नीति का एक महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि एक करोड़ रुपए से अधिक लागत वाली प्रत्येक सड़क परियोजना में सड़क सुरक्षा ऑडिट के लिए परियोजना लागत का एक प्रतिशत अनिवार्य रूप से निर्धारित किया जाएगा।
सड़क दुर्घटनाओं में 6.48 प्रतिशत की कमी
राज्य सरकार द्वारा सड़क सुरक्षा एवं यातायात प्रबंधन के क्षेत्र में किए गए निरंतर प्रयासों का सकारात्मक परिणाम सामने आया है। वर्ष 2023 की तुलना में वर्ष 2024 में हिमाचल प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं में 6.48 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई थी।
मानव जीवन और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता : सीएम सुक्खू
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि सड़क सुरक्षा ऑडिट नीति विकास के प्रत्येक चरण में संभावित जोखिमों की पहचान कर समय रहते आवश्यक सुधारात्मक उपाय सुनिश्चित करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार स्वतंत्र सड़क सुरक्षा ऑडिट को संस्थागत रूप देकर तथा सभी स्तरों पर जवाबदेही सुनिश्चित करके सड़क सुरक्षा के प्रति सक्रिय और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपना रही है।
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