Himachal: प्राकृतिक आपदाओं में लापता लोगों के परिजनों को जल्द मिलेंगे मृत्यु प्रमाण पत्र, गृह मंत्रालय ने जारी किए निर्देश

punjabkesari.in Sunday, Nov 02, 2025 - 11:26 PM (IST)

शिमला (भूपिन्द्र): हिमाचल प्रदेश में इस वर्ष मानसून के दौरान भूस्खलन, बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा में लापता हुए लोगों के परिजनों को मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए 7 वर्ष का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। उन्हें जल्द ही मृत्यु प्रमाण पत्र मिलेंगे। आपदा में लापता लोगों के मृत्य के पंजीकरण के लिए वर्ष 2023 के दिशा-निर्देश लागू होंगे। सरकार के पत्र के जवाब में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मानसून के दौरान प्राकृतिक आपदा में लापता लोगों के मृत्यु पंजीकरण व प्रमाण पत्र जारी करने को लेकर दिशा निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों में साफ तौर से कहा गया है कि वर्ष 2025 की प्राकृतिक आपदाओं में लापता लोगों के मामलों में भी वर्ष 2023 वाले दिशा-निर्देश लागू होंगे। यह निर्देश केवल 2025 के मानसून में हुई प्राकृतिक आपदाओं में लापता हुए लोगों तक ही सीमित रहेंगे तथा भविष्य की आपदाओं के लिए नए सिरे से मंजूरी लेनी होगी। 

सामान्य तौर से लापता लोगों के मृत्यु प्रमाण पत्र 7 वर्ष का इंतजार करना पड़ता है। इस वर्ष आपदा में मारे गए 46 लापता लोगों के परिजनों को मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए 7 वर्ष का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इस संबंध में केंद्र द्वारा जारी पत्र में बताया गया है कि जिन व्यक्तियों के शव मिल चुके हैं, उनके मामलों में सामान्य प्रक्रिया के तहत मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए जाएंगे। जो व्यक्ति लापता हैं और जिनकी मृत्यु की संभावना है, उनके मामलों में उत्तराखंड राज्य के लिए 21 फरवरी 2021 को जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार कार्यवाही की जाएगी। वर्ष 2021 के निर्देशों के तहत 30 दिन के भीतर दावों और आपत्तियों का समाधान किया जाएगा। इसके लिए प्रदेश के सभी जिलों के परगना मैजिस्ट्रेट या उप जिलाधिकारी को अभिहित अधिकारी और जिलाधिकारी को अपीलीय अधिकारी नामित किया गया।

 प्रथम श्रेणी के अंदर आने वाले लापता व्यक्तियों की सूची समाचार पत्र एवं सरकारी वैबसाइट पर प्रकाशित कर दी जाएगी और 30 दिनों का इंतजार किया जाएगा। 30 दिनों के भीतर सभी दावे एवं आपत्तियां प्राप्त की जाएंगी। यदि 30 दिनों के भीतर तक कोई भी दावा या आपत्ति नहीं मिलती है तो मृत्यु प्रमाण पत्र दे दिया जाएगा। मृत्यु का पंजीकरण अधिनियम के अधीन मृत्यु होने से संबंधित स्थान पर किया जाएगा। इसके अनुपालन में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण निदेशालय ने सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों एवं जिला रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) को पत्र जारी कर इन दिशा-निर्देशों को लागू करने के आदेश दिए हैं। मुख्य रजिस्ट्रार (जन्म एवं मृत्यु) सह-निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं, हिमाचल प्रदेश द्वारा सभी जिलों को निर्देशित किया गया है कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों (सहित कैंटोनमेंट एरिया) में संबंधित अधिकारियों तक इन दिशा-निर्देशों की जानकारी तुरंत पहुंचाई जाए और अनुपालन की रिपोर्ट निदेशालय को भेजी जाए।

मानसून के दौरान हुई 427 लोगों की मौत
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ताजा रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में मानसून के दौरान कुल 427 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 46 लोग अभी भी लापता हैं। इनमें से करीब 242 मौतें बारिश से जुड़ी घटनाओं (भूस्खलन, बाढ़, बिजली गिरने आदि) में हुई है, जबकि कुछ लोगों की जान सड़क हादसे में गई है। इसके अलावा प्रदेश में आई आपदा के कारण 481 लोग घायल हुए हैं और 8,858 से अधिक घर पूरी तरह या आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इसके अलावा, 2,478 मवेशियों की मौत हो चुकी है और 26,955 पोल्ट्री पक्षी भी मारे गए हैं। राज्य में 584 दुकानें और 7,048 पशुशालाएं बारिश और भूस्खलन की वजह से ध्वस्त हो चुकी हैं। आपदा के कारण प्रदेश को अब तक 5 हजार करोड़ रुपए से अधिक का नुक्सान होने का अनुमान है।


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Vijay

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