HPBOSE का 139 करोड़ रुपए का अनुमानित बजट पास, SOS परीक्षार्थियों को मिली राहत

9/14/2021 11:00:04 PM

धर्मशाला (नवीन): हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड का वर्ष का 139 करोड़ रुपए का अनुमानित बजट पास हो गया है। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड परिसर में मंगलवार को हुई 117वीं बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। एसओएस के माध्यम से जो फीस ली जाती थी, उसमें कटौती की गई है। बोर्ड अध्यक्ष डाॅ. सुरेश कुमार सोनी ने कहा कि यदि फ्रैश एडमिशन या डायरैक्ट एडमिशन एसओएस विद्यार्थी की होती थी तो आठवीं में शुल्क 2400 रुपए लेते थे। अब 2000 रुपए लिए जाएंगे। इसी तरह 10वीं में 2840 रुपए शुल्क था जिसे 2400 रुपए कर दिया है तथा 12वीं में 2440 रुपए शुल्क होता था जिसे 2300 रुपए कर दिया गया है। यदि रैगुलर कोई बच्चा पास हुआ है और वह एसओएस के माध्यम से पढ़ाई करना चाहता है तो जिन-जिन विषयों में वह पास हो गया है तो उसके क्रैडिट ट्रांसफर कर देते थे। वह बच्चा उन्हीं विषयों को पास करता है जिनमें फेल होता है। ऐसे बच्चों के लिए भी परीक्षा शुल्क में कमी हुई है। 8वीं के बच्चों का 2320 रुपए शुल्क होता था जिसे अब 2100 रुपए लेंगे। दसवीं में 2300 रुपए व 12वीं का 2200 रुपए शुल्क लिया जाएगा। इसी तरह री-अपीयर विद्यार्थियों को भी राहत दी है। अतिरिक्त विषयों की परीक्षा में भी शुल्क में कमी की गई है।

दोबारा जारी होने वाले प्रमाण पत्र में नहीं अंकित होगा डुप्लीकेट शब्द, 2 शिक्षकों को राहत

बोर्ड अध्यक्ष ने कहा कि दोबारा जारी होने वाले प्रमाण पत्र पर डुप्लीकेट शब्द अंकित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी के प्रमाण पत्र में नाम व डेट ऑफ बर्थ त्रुटियां होने पर विद्यार्थियों को रिजल्ट निकलने के 2 महीने के बाद उस त्रुटि को ठीक करने का मौका दिया जाता था। इस दौरान उनसे 50 रुपए शुल्क लिया जाता था। सामान्य शाखा द्वारा 1000 रुपए शुल्क लिया जाता था लेकिन अब प्रमाण पत्र में डुप्लीकेट शब्द का प्रयोग नहीं होगा तथा संबंधित ब्रांच इस त्रुटि को ठीक करेगी तथा वहां पर शुल्क 500 रुपए लिया जाएगा। वहीं बोर्ड अध्यक्ष ने कहा कि 2 शिक्षकों को राहत दी है। उन्होंने कहा कि 2 अध्यापक जो प्रवक्ता गणित थे, मूल्यांकन पर त्रुटि होने के चलते उन्हें हमेशा के लिए डिबार कर दिया था लेकिन अब उन्हें वार्निंग के साथ राहत दी है।

अन्य राज्यों के एसओएस प्रमाण पत्र को मिलेगी मान्यता

अन्य राज्यों के एसओएस प्रमाण पत्रों को बोर्ड मान्यता देगा। शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष ने कहा कि अन्य राज्यों द्वारा भी एसओएस के माध्यम से परीक्षा ली जाती हैं लेकिन पहले उसे हिमाचल में मान्यता नहीं मिलती थी लेकिन अब अन्य राज्यों के प्रमाण पत्र को प्रदेश एसओएस के समकक्ष माना जाएगा। प्रदेश से जारी एसओएस सर्टीफिकेट उक्त राज्य का बोर्ड भी मान्यता देगा। प्रदेश बोर्ड में सेवाएं दे रहे दैनिक भोगी को भी 5 साल के बाद नियमित किया जाएगा। इसके अलावा बोर्ड संजौली स्थित अपनी प्रॉप्टी का मार्कीट वैल्यू असैस करवाएगा।

अभिभावकों की भागीदारी विद्यार्थियों को दिलाएगी अंक

अभिभावकों की भागीदारी अब विद्यार्थियों को हर विषय अंक दिलाएगी। इसके अलावा विद्यार्थियों का व्यवहार और उनकी लर्निंग कैपेस्टी भी उन्हें हर विषय में अंक का इजाफा कर सकेगी। लोकल इतिहास की जानकारी रखने वाले विद्यार्थी भी अपने प्रोग्रैस रिपोर्ट में अंकों का सुधार कर सकेंगे। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत बने पाठ्यक्रम में इस तरह की व्यवस्था रहेगी। बोर्ड द्वारा बनाए गए प्रारूप को बुधवार को प्रदेश सरकार के समक्ष रखा जाएगा।

अब मात्र 50 अंकों की होंगी एकैडमिक परीक्षाएं

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत परीक्षाओं में एकैडमिक का हिस्सा मात्र 50 अंकों का रखा जाएगा। 25 अंक शिक्षकों द्वारा क्लास में छात्रों की करवाई जाने वाली पढ़ाई, क्लास टैस्ट व अन्य प्रैक्टीकल परीक्षाओं के प्रदान किए जाएंगे। वहीं 25 अंक अतिरिक्त गतिविधियों के तय किए गए हैं।

ये भी लिए गए फैसले

कनिष्ठ सहायक को 10 साल की बजाय 9 साल में पदोन्नत किया जाएगा। बोर्ड के 5 कनिष्ठ सहायक जिनका 9 साल का कार्यकाल हो चुका है, उन्हें पदोन्नत किया गया है। उत्तर पुस्तिकाओं के बंडल उठाने के लिए 2007 के निर्धारित 10 रुपए प्रति बंडल के रेट को बढ़ाकर 15 रुपए किया गया है। शिक्षा बोर्ड की कैंटीन के संचालक का बकाया माफ  करने का प्रस्ताव प्रदेश सरकार को भेजा जाएगा।

प्रमाण पत्र व माइग्रेशन प्रमाण पत्र ड्राॅपिंग सैंटरों को प्रेषित

बोर्ड अध्यक्ष डाॅ. सुरेश कुमार सोनी ने कहा कि अप्रैल 2021 में संचालित की गई 10वीं व 12वीं कक्षाओं की वार्षिक परीक्षाओं से संबंधित मूल प्रमाण पत्र व माइग्रेशन प्रमाण पत्र 14 सितम्बर से बोर्ड द्वारा स्थापित किए गए ड्राॅपिंग केंद्रों को प्रेषित किए जा रहे हैं। उन्होंने समस्त निजी व सरकारी विद्यालयों के प्रधानाचार्यों/मुख्याध्यापकों से कहा कि वे संबंधित ड्राॅपिंग केंद्रों से अपने विद्यालयों के प्रमाण पत्र प्राप्त करें।

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Content Writer

Vijay

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