Himachal: विक्रमादित्य के समर्थन में आए शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, जानिए क्या कहा
punjabkesari.in Friday, Jan 16, 2026 - 01:42 PM (IST)
हिमाचल डेस्क। हिमाचल प्रदेश की राजनीति में इन दिनों 'अपनों बनाम बाहरी' अफसरशाही की बहस ने एक नया मोड़ ले लिया है। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह द्वारा बाहरी राज्यों के अफसरों को लेकर छेड़ी गई मुहिम ने सुक्खू कैबिनेट के भीतर ही वैचारिक मतभेद उजागर कर दिए हैं। जहाँ कुछ मंत्री उनके साथ खड़े दिख रहे हैं, वहीं कुछ इसे प्रदेश के हित में आत्मघाती कदम मान रहे हैं।
शिक्षा मंत्री का 'संतुलित' समर्थन:
इस पूरे विवाद में शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर का बयान सबसे महत्वपूर्ण बनकर उभरा है। उन्होंने विक्रमादित्य सिंह की कार्यक्षमता की तारीफ करते हुए उनके संशयों को जायज ठहराया है। रोहित ठाकुर का मानना है कि:
विक्रमादित्य एक कुशल मंत्री हैं और यदि उनके मन में कोई शंका है, तो मुख्यमंत्री को उसे व्यक्तिगत रूप से दूर करना चाहिए।
नकारात्मक सोच केवल बाहरी अधिकारियों तक सीमित नहीं है, यह स्थानीय अफसरों में भी हो सकती है।
हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि प्रदेश के विकास में अखिल भारतीय सेवा (IAS/IPS) के हर अधिकारी का योगदान अतुलनीय है, चाहे वह किसी भी राज्य का हो।
विक्रमादित्य के तीखे तेवर: "जनता ही मेरी सुरक्षा, पद की परवाह नहीं"
अफसरशाही के साथ जारी इस 'कोल्ड वॉर' में विक्रमादित्य सिंह पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि:
शासक न बनें अफसर: कार्यपालिका को अपनी सीमाओं में रहकर काम करना चाहिए, वे जनता के प्रतिनिधि नहीं हैं।
सुरक्षा की चिंता नहीं: उन्होंने दोटूक कहा कि यदि उनकी सुरक्षा वापस ली जाती है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, क्योंकि हिमाचल की जनता का प्रेम ही उनका सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है।
सिद्धांतों से समझौता नहीं: उन्होंने स्पष्ट किया कि वह टकराव नहीं चाहते, लेकिन प्रदेश के हितों की बलि देकर खामोश भी नहीं बैठेंगे।
राजेश धर्माणी की नसीहत:
राजेश धर्माणी ने इस बयानबाजी पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने विक्रमादित्य के रुख को 'गैर-जरूरी' बताते हुए तर्क दिया कि:
सार्वजनिक मंच पर इस तरह की टिप्पणियां करने से देशभर में हिमाचल की छवि खराब होती है।
यदि हिमाचल बाहरी अफसरों का विरोध करेगा, तो अन्य राज्यों में तैनात हिमाचली मूल के IAS/IPS अधिकारियों को भी भेदभाव का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने सुझाव दिया कि विभागीय शिकायतों को मीडिया के बजाय कैबिनेट की मेज पर सुलझाया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री की 'चुप्पी' और संदेश
दिल्ली दौरे पर गए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस विवाद को शांत करने का प्रयास किया है। उन्होंने इसे एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बताते हुए कहा कि सरकार में मंत्री और अफसरों के बीच कोई बड़ा गतिरोध नहीं है। उनके अनुसार, सभी अधिकारी बेहतर काम कर रहे हैं और ऐसी छोटी-मोटी बातों को तूल देने की आवश्यकता नहीं है।

