शिमला डैंटल कॉलेज में बड़ा फर्जीवाड़ा! 6700 के इम्प्लांट की वसूली जा रही 14000 रुपए फीस

punjabkesari.in Tuesday, Sep 15, 2026 - 12:54 PM (IST)

शिमला (ब्यूरो): हिमाचल प्रदेश के एकमात्र सरकारी डैंटल कॉलेज (शिमला) में मरीजों से मनमानी वसूली और वरिष्ठ डॉक्टरों द्वारा अवैध रूप से प्राइवेट प्रैक्टिस करने का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। कॉलेज के ही कुछ स्टाफ सदस्यों ने इस संबंध में मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य सचिव और मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर शिकायत की है। आरोप है कि पेरियो और ओरल सर्जरी विभाग के 2 वरिष्ठ डॉक्टर सरकारी नियमों और आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। शिकायतकर्ताओं ने मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य सचिव को भेजे गए पत्र में खुलासा किया है कि राज्य सरकार ने आम जनता और गरीब मरीजों की सुविधा के लिए डेंटल कॉलेज में दांतों के इम्प्लांट की फीस 6,700 रुपए निर्धारित की है, लेकिन आरोप है कि ये दोनों डॉक्टर मरीजों से प्रति इम्प्लांट 14,000 रुपए वसूल रहे हैं।

रैकेट में एक वैंडर की भी संलिप्तता 
शिकायत के अनुसार इस पूरे रैकेट में इम्प्लांट सप्लाई करने वाले एक वैंडर की भी संलिप्तता है। बताया गया है कि यह वैंडर तय रकम से ज्यादा वसूली करवाता है और इसके बदले में आरोपी डॉक्टरों को नकद 4,000 से 5,000 रुपये प्रति इम्प्लांट कमीशन दिया जाता है। हद तो यह है कि ओरल सर्जरी विभाग में इस वैंडर को कथित तौर पर एक लॉकर/अलमारी तक उपलब्ध करवाई गई है, जो इस पूरे मामले में मिलीभगत की ओर इशारा करता है।

ड्यूटी के समय प्राइवेट प्रैक्टिस के आरोप
पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि ये डॉक्टर अपनी सरकारी ड्यूटी के समय भी शिमला और इसके आसपास के निजी क्लीनिकों में सेवाएं दे रहे हैं। शिकायत में विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि एक डॉक्टर न्यू शिमला स्थित एक क्लीनिक में और दूसरा डॉक्टर पंथाघाटी स्थित एक क्लीनिक में नियमित रूप से डेंटल इम्प्लांट का काम कर रहे हैं।

चोरी हुआ था ओटी रजिस्टर
शिकायत पत्र में इन डॉक्टरों से जुड़ी एक पुरानी और हैरान करने वाली घटना का भी जिक्र किया गया है। आरोप है कि इनमें से एक डॉक्टर के इशारे पर एक इंटर्न के माध्यम से ओटी (ऑप्रेशन थिएटर) का रजिस्टर चुराया गया था। हालांकि, बाद में इंटर्न को सीसीटीवी फुटेज के आधार पर रंगे हाथों पकड़ लिया गया था और उसने तत्कालीन प्रिंसिपल के समक्ष लिखित में माफीनामा भी दिया था।

मामले की होगी गहन जांच : प्रिंसिपल 
स्टाफ का आरोप है कि कॉलेज प्रशासन ने इस अवैध प्रैक्टिस और लूट को रोकने के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है, जिसके चलते उन्हें शीर्ष अधिकारियों को पत्र लिखना पड़ा। इस पूरे प्रकरण पर प्रतिक्रिया देते हुए सरकारी डैंटल कॉलेज शिमला के मौजूदा प्राचार्य डॉ. योगेश भारद्वाज ने कहा कि उन्हें सोमवार को ही इस संबंध में पत्र प्राप्त हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह कॉलेज में अभी नए हैं, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी गहनता से जांच की जाएगी और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर उचित कार्रवाई होगी।

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Content Writer

Vijay

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