सरकार ने नहीं दिया सहयोग, 400 करोड़ के निवेश से हाथ खींचने को मजबूर हुई कंपनी

punjabkesari.in Thursday, Jan 23, 2020 - 05:28 PM (IST)

ऊना (अमित): एक ओर प्रदेश सरकार बड़े-बड़े कार्यक्रम कर निवेशकों को लुभाने का प्रयास कर रही है लेकिन इसके बिल्कुल विपरीत ऊना जिला के लिए आने वाला 400 करोड़ का निवेश वापस जाने की कगार पर पहुंच चुका है। जुलाई, 2018 में ऊना जिला में एजी डॉटर्स नाम की जर्मनी कंपनी ने नगर परिषद ऊना के साथ एमओयू साइन करके सॉलिड वेस्ट एनर्जी प्रोजैक्ट लगाने की इच्छा व्यक्त की थी। इस प्रोजैक्ट के तहत कंपनी ने सरकार से प्लांट लगाने के लिए 8 से 10 हजार स्क्वेयर मीटर भूमि की मांग की थी। इस प्लांट में ऊना शहर के साथ-साथ 27 पंचायतों और 2 अन्य कस्बों से कूड़ा उठाकर उसका दोहन कर उससे जीरो कार्बन बिजली, जीरो कार्बन डीजल व पीने का पानी बनाया जाना था।
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ग्रामीणों के विरोध के कारण नहीं लग पाया प्रोजैक्ट

दरअसल इस प्रोजैक्ट को लेकर जिला प्रशासन द्वारा कदमताल करते हुए एक गांव में भूमि उपलब्ध करवाई गई थी लेकिन ग्रामीणों के विरोध के कारण उस स्थान पर प्रोजैक्ट नहीं लग पाया। उसके बाद अन्य स्थान पर भूमि के लिए अनेक बार फाइल इधर से उधर घूमती रही और बाद में उद्योग विभाग से बात चली और इस प्रोजैक्ट के लिए पंडोगा इंडस्ट्री एरिया में 2 प्लॉट देखे भी गए और अधिकारियों ने इन्वैस्टर मीट के तहत मुख्यमंत्री के साथ वार्ता भी करवाई लेकिन अब उन प्लॉट्स को देने का भी इंकार हो गया है, ऐसे में बिना भूमि इन्वैस्ट करना मुश्किल है और यदि सरकार भूमि नहीं देगी तो 400 करोड़ रुपए का निवेश कैसे किया जा सकता है?
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कंपनी ने सीएम को पत्र लिखकर अंतिम बार उठाई हस्तक्षेप की मांग

इस प्रोजैक्ट को लगाने में सहयोग न मिलने के कारण कंपनी ने हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री को सीधे पत्र लिखकर अंतिम बार इस मामले में हस्तक्षेप की मांग उठाई है और यदि मुख्यमंत्री की ओर से कोई रिस्पॉन्स नहीं आता है तो कंपनी इस पत्र के माध्यम से ही समझौते को खत्म मानते हुए किसी अन्य प्रदेश का रुख कर लेगी। नगर परिषद ऊना के अध्यक्ष बाबा अमरजोत सिंह बेदी की मानं तो इस प्रोजैक्ट से ऊना जिला को कूड़ा मुक्त होने में काफी सहयोग मिल सकता है। अमरजोत बेदी ने सीएम से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग उठाई है।
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क्या बोले एडीसी ऊना

वहीं एडीसी ऊना अरिंदम चौधरी की मानें तो प्लांट लगाने के लिए भूमि चिन्हित की गई थी लेकिन लोगों के विरोध के कारण उस भूमि पर प्लांट नहीं लग पाया। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रोजैक्ट को औद्योगिक क्षेत्र में लगाया जा सकता है और कंपनी इसके लिए उद्योग विभाग से संपर्क कर सकती है।
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Vijay

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