हिमाचल के इस परिवार पर टूटा दुखाें का पहाड़, माैत से जंग लड़ रहा 4 मासूम बच्चाें का पिता; हालत देख भर आएंगी आपकी आंखें
punjabkesari.in Sunday, Feb 15, 2026 - 12:57 PM (IST)
पधर (किरण): कहते हैं गरीबी इंसान की सबसे बड़ी दुश्मन होती है, लेकिन जब गरीबी के साथ गंभीर बीमारी भी घर का दरवाजा खटखटा दे, तो हंसते-खेलते परिवार उजड़ते देर नहीं लगती। कुछ ऐसा ही मंजर इन दिनों हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला के पधर उपमंडल की ग्राम पंचायत डलाह के गदीबागला गांव में देखने को मिल रहा है, जहां 41 वर्षीय हीरा लाल की दोनों किडनियां फेल हो चुकी हैं। वह बिस्तर तक सीमित होकर रह गए हैं। कभी मेहनत-मजदूरी कर परिवार का पेट पालने वाले हीरा लाल अब खुद जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं।
अब पत्नी और वृद्ध माता-पिता के कंधों पर घर की पूरी जिम्मेदारी
सूरत राम के पुत्र हीरा लाल एक साधारण और मेहनतकश परिवार से ताल्लुक रखते हैं। वह खेतीबाड़ी और दिहाड़ी-मजदूरी कर अपनी तीन बेटियों और एक बेटे की शिक्षा व पालन-पोषण कर रहे थे, लेकिन इस बीमारी ने न केवल उनकी सेहत छीनी, बल्कि परिवार की आर्थिक कमर भी तोड़ दी है। वर्तमान में घर की पूरी जिम्मेदारी उनकी पत्नी और वृद्ध माता-पिता के कंधों पर आ गई है।
लाखों में है इलाज का खर्च
हीरा लाल का उपचार वर्तमान में पीजीआई चंडीगढ़ में चल रहा है। डॉक्टरों के अनुसार उन्हें नियमित डायलिसिस और महंगी दवाइयों की जरूरत है। साथ ही, आगामी समय में किडनी प्रत्यारोपण की भी संभावना जताई गई है, जिसके लिए लाखों रुपए की आवश्यकता है। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी सुदृढ़ नहीं है कि वे इस भारी-भरकम खर्च को वहन कर सके।
बच्चों के भविष्य पर मंडराया संकट
आय का कोई स्थाई साधन न होने के कारण परिवार के सामने अब दो वक्त की रोटी और बच्चों की पढ़ाई जारी रखना भी एक बड़ी चुनौती बन गया है। छोटे-छोटे मासूम बच्चों की आंखों में अपने पिता को फिर से स्वस्थ देखने की उम्मीद है, लेकिन तंगहाली इस उम्मीद के आड़े आ रही है।
परिवार ने लगाई मदद की गुहार
संकट की इस घड़ी में हीरा लाल और उनके परिजनों ने क्षेत्र के दानी सज्जनों, सामाजिक संस्थाओं, जनप्रतिनिधियों और आम जनता से आर्थिक सहायता की गुहार लगाई है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि यदि समाज का थोड़ा-सा सहयोग मिल जाए, तो हीरा लाल को नया जीवन मिल सकता है और उनके बच्चों का भविष्य संवर सकता है।

