Bilaspur: हाईकोर्ट ने रद्द की रेलवे भूमि अधिग्रहण की प्रारंभिक अधिसूचना
punjabkesari.in Wednesday, Sep 30, 2026 - 06:55 PM (IST)
बिलासपुर (अंजलि): भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी ब्रॉडगेज रेल लाइन के निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने 29 मार्च 2023 को जारी प्रारंभिक भूमि अधिग्रहण अधिसूचना को निरस्त कर दिया है। अदालत ने पाया कि निर्धारित 12 माह की अवधि के भीतर भूमि अधिग्रहण की आवश्यक घोषणा नहीं की गई और अवधि बढ़ाने के लिए जारी अधिसूचनाओं में कानून के अनुरूप पर्याप्त एवं स्पष्ट कारण दर्ज नहीं किए गए। यह फैसला बरमाणा निवासी कुलदीप ठाकुर व अन्य बनाम हिमाचल प्रदेश सरकार व अन्य मामले में न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल और न्यायमूर्ति योगेश जसवाल की पीठ ने 29 सितम्बर 2026 को सुनाया।
538 बीघा से अधिक भूमि अधिग्रहण का मामला
नोग से बरमाणा तक प्रस्तावित रेलवे परियोजना के लिए करीब 538 बीघा 9 बिस्वा और 0.5 बिस्वांसी भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसमें नोग की 60.6 बीघा, बेहली चलेहड़ा की 4 बीघा, पराथू की 24.35 बीघा, बगड़ी की 22.9 बीघा, बैरी की 7 बिस्वा, खतेड़ की 210.2 बीघा, भटेड़ की 104.5 बीघा और बरमाणा की 91.8 बीघा भूमि शामिल थी। याचिकाकर्त्ताओं के अनुसार बिलासपुर सदर तहसील के ऊपरी भटेड़, बरमाणा और खतेड़ गांवों में कृषि भूमि तथा मकानों वाली जमीन रेलवे लाइन के निर्माण के लिए अधिगृहीत की जा रही थी।
याचिकाकर्त्ताओं ने भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकर एवं पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 की धारा 19(7) के तहत निर्धारित समयसीमा का पालन न किए जाने का मुद्दा उठाया था। हाईकोर्ट ने पाया कि प्रारंभिक अधिसूचना 29 मार्च 2023 को जारी हुई थी, लेकिन इसके बाद निर्धारित 12 माह के भीतर धारा 19(1) के तहत आवश्यक घोषणा नहीं की गई। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए सरकार की ओर से 16 मार्च 2024, 24 मार्च 2025 और 25 मार्च 2026 को अवधि बढ़ाने संबंधी अधिसूचनाएं जारी की गईं। हालांकि अदालत ने इन अवधि विस्तार आदेशों में दर्ज कारणों और अपनाई गई प्रक्रिया की भी जांच की।
अदालत ने कहा कि धारा 19(7) के तहत अवधि बढ़ाने से पहले सरकार को अपने निर्णय के कारण लिखित रूप में दर्ज करने थे। साथ ही इन कारणों को अधिसूचित करने और वैबसाइट पर अपलोड करने की कानूनी आवश्यकता भी थी। हाईकोर्ट ने पाया कि सरकारी रिकॉर्ड में ऐसा कोई ठोस और स्पष्ट कारण दर्ज नहीं था, जिससे यह साबित हो सके कि अवधि बढ़ाने के लिए कानून में निर्धारित प्रक्रिया का विधिवत पालन किया गया। अदालत के अनुसार केवल यह कहना कि पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन योजना अनिवार्य प्रशासनिक परिस्थितियों के कारण अंतिम रूप नहीं ले सकी पर्याप्त नहीं है। ऐसी परिस्थितियों और वास्तविक बाधाओं का स्पष्ट विवरण सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज होना आवश्यक था।
हाईकोर्ट ने माना कि धारा 19(7) के तीसरे प्रावधान का पालन नहीं किया गया। इसके परिणामस्वरूप 29 मार्च 2023 की प्रारंभिक अधिसूचना कानून के तहत स्वतः निरस्त मानी गई। अदालत ने वर्ष 2024, 2025 और 2026 में अवधि बढ़ाने के लिए जारी अधिसूचनाओं को भी कानूनन गलत ठहराते हुए याचिका स्वीकार कर ली। हाईकोर्ट के इस फैसले से भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी रेलवे लाइन के लिए संबंधित क्षेत्रों में चल रही भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पर सीधा असर पड़ा है। फैसले में अदालत ने स्पष्ट किया कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में निर्धारित समयसीमा और कानून में तय प्रक्रियाओं का पालन अनिवार्य है।

